आम और अमरूद की फसल को कीड़ों से बचाने का सस्ता तरीका, सिर्फ 100 रुपये में होगा समाधान बिहार 2 घंटे पहले 3
बरसात के मौसम में अमरूद और आम की फसल में लगने वाले कीड़ों से परेशान किसानों के लिए येलो ट्रैप एक प्रभावी और सस्ता उपाय है, जिससे 60 फीसदी तक नुकसान को रोका जा सकता है।

कीड़ों से बर्बाद होती फसल का पक्का इलाज

बरसात के दौरान अमरूद और आम के बगीचों में फलों के खराब होने की समस्या काफी आम है। कई बार किसान देखते हैं कि उनके बागों में फल अंदर से सड़ने लगते हैं या उनमें कीड़े पड़ जाते हैं। इस समस्या के कारण किसानों को हर साल अपनी कुल पैदावार का 50 से 60 फीसदी तक हिस्सा गंवाना पड़ता है। बगीचों में फल जैसे ही चने के आकार के होते हैं, वैसे ही इन पर कीटों का हमला शुरू हो जाता है। मुख्य रूप से बेटोसेरा नामक कीड़ा इन फलों में अपने अंडे दे देता है, जिससे फल के अंदर लार्वा पनपने लगता है और अंत में पूरा फल सड़कर बर्बाद हो जाता है।

कीट विशेषज्ञों की क्या है सलाह

जहानाबाद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विशेषज्ञ डॉ. वाजिद हसन के अनुसार, जब मादा कीड़ा छोटे फल के भीतर अंडे छोड़ देती है, तो वह लार्वा धीरे-धीरे फल के साथ ही बड़ा होता रहता है। किसान अक्सर इस पर काबू पाने के लिए जहरीले स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह तरीका भी कई बार निष्प्रभावी साबित होता है और अंत तक फल पूरी तरह से खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में, विशेषज्ञ एक प्रभावी और सस्ते उपाय के रूप में फ्रूट फ्लाई ट्रैप के उपयोग की सलाह देते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में येलो ट्रैप भी कहा जाता है।

कैसे काम करता है यह फ्रूट फ्लाई ट्रैप

यह ट्रैप बाजार में लगभग 100 से 125 रुपये की कीमत पर आसानी से उपलब्ध है। इसके काम करने का तरीका बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक है। ट्रैप के भीतर एक विशेष प्रकार का लियोर लगा होता है जिसकी खुशबू मादा फ्रूट फ्लाई को अपनी ओर आकर्षित करती है। जब मादा फल पर अंडे देने के लिए आती है, तो वह इस सुगंध के धोखे में आकर ट्रैप के अंदर घुस जाती है। बॉक्स के अंदर लगी लकड़ी पर विशेष प्रकार का जहर लगा होता है, जिसके संपर्क में आते ही कीट का खात्मा हो जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑर्गेनिक है और इसके इस्तेमाल से कीटनाशक स्प्रे पर होने वाले खर्च में भी बड़ी बचत की जा सकती है।

एक एकड़ के लिए कितना खर्च

फ्रूट फ्लाई का असर अमरूद और आम के अलावा कई तरह की लत्ती वाली सब्जियों पर भी देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक एकड़ बगीचे की सुरक्षा के लिए महज 5 बॉक्स काफी हैं। इससे किसान अपनी फसल को करीब 60 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। ट्रैप के अंदर लगने वाले लियोर को हर 15 दिन में बदलना आवश्यक होता है। लियोर आप बाजार या ऑनलाइन माध्यमों से मात्र 25 से 30 रुपये की कीमत में मंगवा सकते हैं। यह तकनीक न केवल सस्ती है, बल्कि पूरी तरह से जैविक है, जो फलों की गुणवत्ता को बरकरार रखती है और किसानों को आर्थिक हानि से बचाती है। अब इस सरल जुगाड़ को अपनाकर किसान बरसात के मौसम में भी अपने बगीचों को सुरक्षित रख सकते हैं और अपनी मेहनत का पूरा लाभ उठा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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