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एक घंटा पहले
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अलप्पुझा के बैकवॉटर में दिखे माइकल बूलोस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और जाने-माने उद्यमी माइकल बूलोस ने शनिवार को अचानक केरल के अलप्पुझा पहुंचकर हर किसी को चौंका दिया। इन दिनों केरल में मानसून का दौर चल रहा है और राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हो रही है। खराब मौसम के बावजूद, बूलोस ने अलप्पुझा की मशहूर बैकवॉटर यात्रा का अनुभव लिया। उन्होंने वहां की नहरों में हाउसबोट की सवारी की और प्राकृतिक नजारों को करीब से देखा। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बूलोस का स्वागत करते हुए लिखा कि उन्हें अपने दोस्त के साथ केरल में मुलाकात करके काफी खुशी हो रही है। इससे पहले भी बूलोस अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर के दर्शन कर चुके हैं।
पर्यटन की दृष्टि से अलप्पुझा की अहमियत
अलप्पुझा, जिसे दुनिया भर में 'पूर्व का वेनिस' कहा जाता है, अपनी अनोखी भौगोलिक संरचना के लिए जाना जाता है। यहां का व्यापक बैकवॉटर नेटवर्क और पारंपरिक हाउसबोट पर्यटकों के बीच हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद माइकल बूलोस का यहां आना और स्थानीय संस्कृति को अनुभव करना चर्चा का विषय बना हुआ है। उनकी मौजूदगी ने शनिवार को इस पर्यटन स्थल को अंतरराष्ट्रीय मीडिया और पर्यटकों के केंद्र में ला दिया।
नेहरू ट्रॉफी बोट रेस की तैयारी
माइकल बूलोस का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अलप्पुझा में एक बड़े सांस्कृतिक और खेल आयोजन की तैयारी चल रही है। यहाँ जल्द ही 22 अगस्त को प्रसिद्ध नेहरू ट्रॉफी बोट रेस आयोजित की जाएगी। यह दौड़ भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद में आयोजित की जाती है। वर्ष 1952 में जब नेहरू ने अलप्पुझा का दौरा किया था, तब उन्होंने खुद एक स्नेक बोट की सवारी की थी। उसी यात्रा की यादों को सहेजने के लिए उन्होंने दिल्ली वापस जाकर एक आधिकारिक ट्रॉफी की शुरुआत की थी, जो आज भी केरल के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है।
माइकल बूलोस का निजी परिचय
माइकल बूलोस का जन्म अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में हुआ था और उनका अधिकांश बचपन नाइजीरिया के लागोस में बीता। वह एक सक्रिय व्यवसायी हैं और उनकी शादी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी टिफनी ट्रंप से हुई है। दोनों का विवाह वर्ष 2022 में संपन्न हुआ था। हाल ही में, मई 2025 में उनके पहले बच्चे का जन्म हुआ है। बूलोस के केरल दौरे ने जहां एक ओर राज्य की प्राकृतिक खूबसूरती को उजागर किया है, वहीं आगामी नाव उत्सव को लेकर वैश्विक स्तर पर एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।
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