झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
पलामू में सूखे जैसे हालात और किसानों की समस्या
इस बार मानसून की बेरुखी ने पलामू के किसानों के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई महीने में अब तक कुल 217 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इससे पहले जून के महीने में सामान्य से करीब 60 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी। बारिश की इस कमी का सीधा असर धान की रोपाई पर पड़ा है। जिले के कई क्षेत्रों में किसान अब तक अपने खेतों में धान नहीं लगा सके हैं, जिसके चलते विशेषकर ऊंची जमीनें यानी टांड़ वाले खेत अभी भी खाली पड़े हैं। खेतों को खाली देखकर किसान चिंतित हैं और सोच रहे हैं कि अब उनके पास कौन सा विकल्प शेष है।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह: अरहर की खेती है मुफीद
ऐसी विकट परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने किसानों को अरहर की खेती करने का सुझाव दिया है। वैज्ञानिक का कहना है कि आकस्मिक फसल योजना के तहत किसान अगस्त से लेकर सितंबर महीने तक भी अरहर की बुआई कर सकते हैं। अरहर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है और यह कम सिंचाई में भी बेहतर परिणाम देती है। यह फसल लगभग आठ महीने के अंतराल में पककर तैयार हो जाती है। जिन किसानों के पास समय पर धान की रोपाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाया, उनके लिए अरहर एक शानदार विकल्प बनकर सामने आई है।
बीज उत्पादन पर सरकार की ओर से बड़ी प्रोत्साहन राशि
पलामू में अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए झारखंड सरकार और भारत सरकार ने एक विशेष योजना तैयार की है। इसके तहत बीज उत्पादन करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। यदि कोई किसान फाउंडेशन बीज का उपयोग करके उसका सर्टिफाइड बीज तैयार करता है, तो उसे सरकार की ओर से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यदि एक किसान 10 क्विंटल तक बीज का उत्पादन करने में सफल हो जाता है, तो उसे 45,000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि प्राप्त हो सकती है, जो उसकी उत्पादन लागत को कवर करने में मदद करेगी। बीज की बिक्री से होने वाली आय इसके अलावा होगी, जिससे किसानों की शुद्ध कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
खेती की प्रक्रिया और पंजीयन की अंतिम तिथि
डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि एक एकड़ जमीन पर खेती के लिए करीब 6 से 8 किलोग्राम फाउंडेशन बीज की जरूरत होती है। यदि तकनीक का सही पालन किया जाए, तो एक एकड़ से 4 से 5 क्विंटल तक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान में विभाग कई किसानों को फाउंडेशन बीज उपलब्ध करा रहा है ताकि वे इस सरकारी योजना का लाभ उठा सकें। हालांकि, इस लाभ को पाने के लिए किसानों को आधिकारिक पोर्टल पर समय रहते पंजीयन करवाना अनिवार्य है। सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त तय की गई है। अतः जिन किसानों के खेत अभी भी खाली हैं, उनके पास कम लागत और कम पानी में अधिक कमाई करने का यह बेहतरीन अवसर है।
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