ग्रेटर नोएडा के तुस्याना में खुले नाले में जा गिरी कार, बाल-बाल बचा चालक; लोगों ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल उत्तर प्रदेश 2 घंटे पहले 2
ग्रेटर नोएडा के तुस्याना गांव के पास एक कार सड़क किनारे बने खुले नाले में जा गिरी, हालांकि चालक सुरक्षित निकल आया। युवराज मेहता मामले के बाद भी हालात न सुधरने पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है।

ग्रेटर नोएडा में बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। तुस्याना गांव के पास एक कार सड़क किनारे बने खुले नाले में जा गिरी। यह हादसा उस समय हुआ जब चालक वाहन लेकर वहां से गुजर रहा था और अचानक संतुलन बिगड़ने पर कार सीधे नाले में उतर गई। राहत की बात यह रही कि चालक को कोई गंभीर चोट नहीं आई और आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी

घटना के बाद इलाके के लोगों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि क्षेत्र में कई जगहों पर खुले नाले और सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे लंबे समय से खतरा बने हुए हैं। निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई असरदार कदम नहीं उठाया गया।

लोगों के मुताबिक, नालों के आसपास न तो सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है, न बैरिकेडिंग और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। इस वजह से दिन और रात दोनों समय दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर कार की रफ्तार ज्यादा होती या मौके पर लोग मौजूद न होते तो हादसा कहीं अधिक गंभीर रूप ले सकता था।

घटना के बाद कुछ देर के लिए वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और स्थानीय निवासियों ने सुरक्षा इंतजामों की मांग को लेकर अपनी नाराजगी जताई।

युवराज मेहता मामले की ताजा हुई याद

यह घटना लोगों को हाल ही में सुर्खियों में रहे युवराज मेहता मामले की भी याद दिला रही है। उस हादसे के बाद ग्रेटर नोएडा में सड़क सुरक्षा, जलभराव और खुले गड्ढों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे। अधिकारियों ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का भरोसा भी दिलाया था। हालांकि तुस्याना में हुई इस ताजा घटना ने उन तमाम दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश में और बढ़ जाता है खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद जांच और कार्रवाई की बातें तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा उपायों का अभाव जस का तस बना रहता है। खुले नाले और असुरक्षित सड़कें आज भी वाहन चालकों के लिए खतरा बनी हुई हैं। खासकर बारिश के मौसम में ऐसे स्थान और अधिक जोखिम भरे हो जाते हैं, क्योंकि पानी भर जाने से नाले और गड्ढे दिखाई नहीं देते।

तुस्याना की इस घटना में भले ही किसी की जान नहीं गई, लेकिन इसने एक बार फिर साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कभी भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। अब देखना यह होगा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस घटना से सबक लेकर खुले नालों को सुरक्षित बनाने और सड़क किनारे जरूरी सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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