गोपालगंज पुलिस का बड़ा प्रहार, पशु तस्करी से कमाई गई 3.40 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त बिहार एक महीने पहले 31
बिहार के गोपालगंज में पशु तस्करों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस ने कुख्यात तस्कर अरमान खान की 3.40 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त करने के लिए आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को प्रस्ताव भेजा है।

पशु तस्करों की वित्तीय कमर तोड़ने की तैयारी

बिहार के गोपालगंज जिले में संगठित पशु तस्करी के खिलाफ पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस ने न केवल नेटवर्क के मुख्य सरगना को घेरे में लिया है, बल्कि उसके द्वारा अपराध के जरिए बनाई गई करोड़ों की संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। गोपालगंज पुलिस ने इस मामले में PMLA यानी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है।

सीवान के अरमान खान पर पुलिस का शिकंजा

पुलिस जांच में मुख्य आरोपी के तौर पर सीवान जिले के बड़हरिया निवासी अरमान खान का नाम सामने आया है। गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने जब जांच को आगे बढ़ाया, तो पता चला कि अरमान खान कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा पर सक्रिय एक बड़े पशु तस्करी सिंडिकेट का सरगना है।

3.40 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी की करतूतों का कच्चा-चिट्ठा बेहद चौंकाने वाला है:

  • अरमान खान पर विभिन्न थानों में 12 से अधिक आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं।
  • पिछले 10 वर्षों में पशु तस्करी के अवैध धंधे से उसने करीब 3.40 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई है।
  • पुलिस ने बैंक लेन-देन और पुख्ता सबूतों के आधार पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को विस्तृत प्रस्ताव भेज दिया है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

गोपालगंज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संगठित अपराध से कमाई गई संपत्ति को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। EOU अब इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए आरोपी की चल और अचल संपत्ति को जब्त करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी और भविष्य में भी अपराधियों की अवैध कमाई पर चोट करना उनकी प्राथमिकता होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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