कैमूर में सांप के डसने के बाद झाड़फूंक पड़ी भारी, 15 साल के किशोर ने तोड़ा दम बिहार एक घंटा पहले 3
बिहार के कैमूर जिले में छत पर सो रहे दो सगे भाइयों को जहरीले सांप ने काट लिया। परिवार के लोग समय रहते डॉक्टर के पास जाने के बजाय अंधविश्वास के चक्कर में पड़ गए, जिसके चलते एक भाई की मौत हो गई और दूसरा जिंदगी की जंग लड़ रहा है।

अंधविश्वास की भेंट चढ़ा किशोर

बिहार के कैमूर जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास के चलते एक परिवार ने अपना बेटा खो दिया। बरसात के इस मौसम में सांप के काटने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समय रहते सही उपचार न मिलने पर छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। 15 साल के एक किशोर की झाड़फूंक के चक्कर में जान चली गई, जबकि उसका छोटा भाई गंभीर हालत में इलाज करा रहा है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला कुदरा थाना क्षेत्र के अजगरा गांव का है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान धर्मवीर के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 15 साल थी। उसके साथ उसका छोटा भाई धर्मराज भी था, जिसकी उम्र 12 साल बताई गई है। दोनों भाई बीती रात अपने घर की छत पर चैन की नींद सो रहे थे, तभी अचानक किसी जहरीले सांप ने उन दोनों को डंस लिया।

अस्पताल की जगह ओझा के पास दौड़े परिजन

सांप के काटने के बाद परिवार के लोग घबरा गए, लेकिन दुर्भाग्य से उन्होंने अस्पताल भागने के बजाय अंधविश्वास का सहारा लिया। परिजनों ने दोनों बच्चों को तुरंत इलाज के लिए चिकित्सक के पास ले जाने के बजाय पास के ही कर्मा गांव में एक ओझा के पास झाड़फूंक कराने के लिए ले जाना उचित समझा। घंटों तक वहां ओझाई चलती रही, जबकि जहर शरीर में तेजी से फैल रहा था। समय बीतने के साथ-साथ दोनों भाइयों की स्थिति लगातार नाजुक होती गई।

डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

जब झाड़फूंक से कोई राहत नहीं मिली और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तब परिजन घबराकर उन्हें मोहनियां अनुमंडल अस्पताल ले गए। वहां तैनात डॉक्टरों ने जांच के बाद बड़े भाई धर्मवीर को मृत घोषित कर दिया। वहीं, छोटे भाई धर्मराज की हालत को देखते हुए उसे पहले भभुआ सदर अस्पताल भेजा गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया है।

समय पर इलाज होता तो बच सकती थी जान

मृतक के पिता सत्येंद्र बैठा ने दुख जाहिर करते हुए बताया कि दोनों बच्चे छत पर सोए हुए थे तभी सांप ने हमला किया। स्थानीय निवासी महेंद्र कुमार का मानना है कि यदि परिवार ने अंधविश्वास के फेर में न पड़कर तुरंत अस्पताल का रुख किया होता, तो शायद आज धर्मवीर जीवित होता। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की भी मांग उठाई है।

विशेषज्ञों की सलाह

यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि सांप के काटने पर ओझा या झाड़फूंक पर भरोसा करना कितना घातक हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि सर्पदंश के मामले में हर मिनट कीमती होता है। सरकारी अस्पतालों में इसके लिए एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध हैं। यदि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुँचाया जाए, तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। अंधविश्वास के चक्कर में कीमती समय बर्बाद करना मौत को बुलावा देने के समान है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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