गया के रंजीत की मिसाल! 11 रुपये के नींबू पौधे ने पलटी तकदीर, नीलगाय की मार के बीच कमाए 10 लाख भारत एक घंटा पहले 2
बिहार के गया जिले के शेरघाटी प्रखंड के किसान रंजीत कुमार ने नीलगाय के आतंक से उबरने के लिए नींबू की बागवानी अपनाई और महज 11 रुपये के पौधे से शुरू हुआ सफर अब सालाना लाखों की कमाई तक पहुंच गया है। इसी आमदनी से वे बेटे को एमबीए और बेटी को नर्सिंग की पढ़ाई करा रहे हैं।

क्या महज 11 रुपये का एक नींबू का पौधा किसी किसान की किस्मत बदल सकता है? बिहार के गया जिले के शेरघाटी प्रखंड क्षेत्र के नवादा गांव के रहने वाले किसान रंजीत कुमार की कहानी इसी सवाल का जवाब है। उनका लगाया एक नींबू का पौधा साल भर बाद ही सालाना करीब 3 हजार रुपये की आमदनी देने लगा।

रंजीत कुमार ने आज से 7 साल पहले उद्यान विभाग के सहयोग से लगभग पांच कट्ठा जमीन में 75 नींबू के पेड़ लगाए थे। उन दिनों उद्यान विभाग की ओर से एक नींबू का पौधा 7 रुपये में मिला था, जिस पर ट्रांसपोर्टेशन चार्ज जोड़ने के बाद एक पौधे की कुल कीमत 11 रुपये बैठी थी।

सिर्फ 850 रुपये की लागत और लाखों का मुनाफा

इन 75 पेड़ों को लगाने में रंजीत कुमार का कुल खर्च लगभग 850 रुपये आया था। पौधे लगाने के अगले ही साल इनमें फलन शुरू हो गया। हालांकि पहले साल उन्होंने पेड़ों से फल नहीं लिया, लेकिन दूसरे साल से हर पेड़ में सालाना 1000 से अधिक नींबू आने लगे।

बाजार में न्यूनतम 3 रुपये प्रति पीस की दर से नींबू की बिक्री होने लगी। इस तरह एक पेड़ से उन्हें साल भर में 3 हजार रुपये की कमाई होने लगी और कुल 75 पेड़ों से सालाना 2 लाख रुपये से अधिक की शानदार आमदनी मिलने लगी।

रंजीत पिछले 5 साल से लगातार नींबू की फसल ले रहे हैं और अब तक इन्हीं 75 पेड़ों से 10 लाख रुपये से अधिक कमा चुके हैं। उनका मानना है कि नींबू की बागवानी में बेहद कम लागत, कम मेहनत और बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है।

नीलगाय के आतंक का निकाला पक्का इलाज

किसान रंजीत कुमार बताते हैं कि नींबू की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे न तो आवारा जानवर नुकसान पहुंचाते हैं और न ही इंसान। उनके मुताबिक, वे सालों से इलाके में नीलगायों के आतंक से बेहद परेशान थे, जो उनकी हर पारंपरिक फसल को बर्बाद कर देती थीं। इसी वजह से उन्होंने नींबू की बागवानी का रुख किया।

उनका कहना है कि नींबू की बागवानी में बार-बार खेत की जुताई और बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। जिस तरह गांवों में नीलगाय का आतंक बढ़ा हुआ है, उसे देखते हुए इससे बेहतर खेती और कोई नहीं हो सकती। पेड़ों में साल भर फलन होता है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। खासकर गर्मी के दिनों में नींबू की डिमांड और कीमत दोनों काफी बढ़ जाती हैं।

नींबू की कमाई से बेटा कर रहा एमबीए, बेटी करेगी नर्सिंग

रंजीत बताते हैं कि नींबू की बागवानी से आज उन्हें इतनी अच्छी आमदनी हो रही है कि इसी कमाई से वे अपने बेटे को मगध विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई करा रहे हैं, जबकि बेटी को बीएससी नर्सिंग कराने की तैयारी में जुटे हैं। इसके साथ ही नींबू से होने वाली आमदनी के कुछ हिस्से का इस्तेमाल वे अपना घर बनाने में भी कर रहे हैं।

उन्होंने क्षेत्र के दूसरे किसानों को भी सलाह दी है कि नींबू की बागवानी बेहद लाभदायक है और इसमें नुकसान की गुंजाइश न के बराबर है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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