जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
गौर गोपाल दास भारत के जाने-माने आध्यात्मिक गुरु और प्रेरक वक्ता हैं, जो इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस से जुड़े हुए हैं। जीवन के गहरे सत्यों को बेहद सरल, सहज और हास्यपूर्ण अंदाज में समझाने की उनकी शैली, उनका सौम्य स्वभाव और हाजिरजवाबी उन्हें खासकर युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है। उनके विचार लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं और वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बातें दूर-दूर तक पहुंचाते हैं।
इंजीनियर से भिक्षु बनने तक का सफर
अध्यात्म की राह चुनने से पहले गौर गोपाल दास ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित संस्थान 'कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे' से डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक हेवलेट पैकार्ड कंपनी में बतौर इंजीनियर काम किया। साल 1996 में उन्होंने कॉरपोरेट जगत की नौकरी को अलविदा कह दिया और भिक्षु (Monk) बनने का निर्णय लिया। इसके बाद वे मुंबई के चौपाटी स्थित इस्कॉन मंदिर से जुड़ गए। आज उनके चाहने वालों की संख्या बहुत बड़ी है।
गौर गोपाल दास के प्रेरक विचार
- हमारी फिंगरप्रिंट सबसे अलग और सबसे यूनिक होती है। किसी एक इंसान की फिंगरप्रिंट दूसरे से मेल नहीं खाती। जब यह इतनी अनूठी है, तो फिर आप भी अपनी पहचान को अनूठा क्यों न बनाएं।
- जीवन को एक बहाव में जीना सीखिए। जब कुछ बुरा हो रहा हो तो उस पर बहुत ज्यादा ध्यान मत दीजिए, और जो अच्छा हो रहा हो उसे भी जरूरत से ज्यादा रोककर या जकड़कर मत रखिए।
- हमें किसी को कभी भी ऐसा एहसास नहीं कराना चाहिए कि वह हमारी गलतियों को कभी भुला ही न पाए।
- यह देखने से बेहतर है कि कौन सही है और कौन गलत, हमें यह देखना चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत। अक्सर हम 'कौन' के चक्कर में 'क्या' को भूल जाते हैं।
- असफलताएं आपको परिभाषित नहीं करतीं, बल्कि आपको फिर से कुछ नया सिखाती हैं। अगर आप कभी असफल ही नहीं होंगे, तो सीखेंगे कैसे।
- हर चीज में अच्छाई ढूंढने का जो दबाव है, वह जरूरी नहीं है। अगर कोई चीज बुरी है तो वह बुरी ही है। अगर आपको अपनी मानसिक सेहत ठीक रखनी है तो यह दबाव लेना बंद कर दीजिए।
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