उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले से मेडिकल की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के साथ धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े रैकेट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां की स्थानीय पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो मेडिकल कॉलेजों में अवैध तरीके से दाखिला कराने के नाम पर न केवल मोटी रकम वसूल रहा था, बल्कि फर्जी कागजातों का सहारा लेकर पूरी व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश कर रहा था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस फर्जीवाड़े में शामिल मुख्य सरगना समेत छह आरोपियों को पुलिस ने धर दबोचा है और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। यह गिरोह मुख्य रूप से NEET-UG 2025 की परीक्षा में कम अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाता था।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के नाम पर रची गई साजिश
पुलिस प्रशासन द्वारा की गई गहन पूछताछ और शुरुआती जांच में इस गिरोह के काम करने के अनोखे और बेहद शातिर तरीके का खुलासा हुआ है। यह गिरोह उन छात्र-छात्राओं की तलाश में रहता था जिन्होंने NEET परीक्षा तो दी थी, लेकिन उनके अंक इतने कम थे कि उन्हें सामान्य प्रक्रिया के तहत किसी भी अच्छे मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिलना पूरी तरह से नामुमकिन था। ऐसे निराश छात्रों और उनके अभिभावकों को यह गिरोह अपने जाल में फंसाता था। गिरोह के सदस्य इन कमजोर अंक वाले छात्रों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटा के अंतर्गत आरक्षित सीट पर दाखिला दिलाने का बड़ा प्रलोभन देते थे।
इस कोटे का अवैध लाभ उठाने के लिए गिरोह के शातिर सदस्यों ने खुद ही फर्जी और पूरी तरह से नकली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करने का धंधा शुरू कर दिया था। वे बेहद सफाई से इन जाली दस्तावेजों को तैयार करते थे ताकि पहली नजर में कोई इन पर शक न कर सके। इसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर वे मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का काम करते थे। जांच में यह बात साफ हुई है कि इस गिरोह ने कुल 9 छात्रों के ऐसे ही कूटरचित दस्तावेज तैयार किए थे और उन्हें इस विशेष कोटे के जरिए मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने की पूरी तैयारी कर ली थी।
दस्तावेजों की गहन जांच में खुला धोखाधड़ी का राज
इस बड़े पैमाने पर चल रहे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब मेडिकल विभाग के उच्च अधिकारियों को इन दाखिलों को लेकर कुछ संदेह हुआ। इसके बाद अधिकारियों के निर्देश पर इन सभी 9 छात्रों के द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की बहुत ही बारीकी और गहराई से जांच करने के आदेश दिए गए। इस संबंध में अगस्त 2025 में एक आधिकारिक पत्र भेजा गया था, जिसके बाद संबंधित सरकारी विभागों ने इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच शुरू की।
जब राजस्व और अन्य संबंधित विभागों ने रिकॉर्ड का मिलान किया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जांच में यह प्रमाणित हो गया कि इन सभी नौ छात्रों के नाम पर जारी किए गए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र पूरी तरह से जाली, फर्जी और मनगढ़ंत थे। सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे किसी भी प्रमाण पत्र का कोई अस्तित्व ही नहीं था। जैसे ही कागजातों का यह फर्जीवाड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित हुआ, भदोही पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। पुलिस ने इस संबंध में तत्काल सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया और आरोपियों की धरपकड़ के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया।
मुख्य सरगना संजय दुबे सहित छह आरोपी पहुंचे जेल
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने लगातार छापेमारी की और गिरोह के नेटवर्क को खंगालना शुरू किया। पुलिस को जल्द ही गिरोह के काम करने के तौर-तरीकों और इसमें शामिल चेहरों के बारे में पुख्ता जानकारियां हाथ लगीं। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी करते हुए इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड संजय दुबे को गिरफ्तार कर लिया।
संजय दुबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों पर भी शिकंजा कसा। इस कार्रवाई में गिरोह के पांच अन्य सक्रिय सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए इन सभी छह आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जेल भेज दिया गया है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस टीम अब इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन से बिचौलिए शामिल हैं। इसके साथ ही, पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि इन फर्जी प्रमाण पत्रों को बनवाने और उन्हें सत्यापित दिखाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों से संपर्क साधा गया था या उनकी मिलीभगत थी।
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