जापानी तकनीक से लदेगा बागों में फलों का अंबार: धूप, बारिश और कीड़ों से अब मिलेगी सुरक्षा उत्तराखंड 2 महीने पहले 72
उत्तराखंड के बागवान अब अपनी फसल को खराब मौसम और कीड़ों से बचाने के लिए जापानी फ्रूट बैगिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस विधि से न केवल फल सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और बाजार में कीमत भी बेहतर मिलती है।

बागवानी में नई क्रांति लाएगी जापानी तकनीक

उत्तराखंड के बागवानों के लिए जापानी फ्रूट बैगिंग तकनीक एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। यह विधि अब आम, लीची और अमरूद जैसे फलों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने का मुख्य जरिया बन गई है। पिछले 2 सालों से इस तकनीक का सफल प्रयोग किया जा रहा है, जिससे किसानों को काफी लाभ मिल रहा है।

कैसे काम करती है फ्रूट बैगिंग विधि?

राजकीय उद्यान सर्किट हाउस के सीनियर हॉर्टिकल्चर इंस्पेक्टर दीपक पुरोहित ने बताया कि यह तकनीक विशेष रूप से तैयार किए गए कॉटन या कागज के बैग पर आधारित है। इन बैगों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सुरक्षा कवच: यह बैग फल को चिलचिलाती धूप, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से पूरी तरह ढंककर सुरक्षित रखते हैं।
  • कीटों से बचाव: फ्रूट फ्लाई जैसे खतरनाक कीटों का प्रकोप इस तकनीक के इस्तेमाल से काफी हद तक कम हो गया है।
  • बेहतर जल निकासी: इन बैगों में पानी निकलने की विशेष व्यवस्था है, जिससे फल के अंदर नमी नहीं टिकती और वह सड़ने से बचा रहता है।

फलों की गुणवत्ता और बाजार भाव में इजाफा

इस जापानी तकनीक को अपनाने के बाद फलों के रंग, रूप और स्वाद में स्पष्ट सुधार देखने को मिला है। चूंकि फल बाहरी खतरों से सुरक्षित रहते हैं, इसलिए उनकी बनावट अधिक आकर्षक हो जाती है। बाजार में बेहतर गुणवत्ता वाले फलों की मांग अधिक रहती है, जिसके कारण किसानों को उनकी फसल का पहले की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा मिल रहा है। उद्यान विभाग इस विधि को लेकर काफी उत्साहित है और इसे बागवानी के क्षेत्र में एक सफल कदम मान रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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