फ्रांस में छात्रों का हिंसक प्रदर्शन: स्कूल सुधारों की मांग पर उतरे लाखों छात्र, 2000 से ज्यादा गिरफ्तार विश्व एक घंटा पहले 4
फ्रांस में अपनी शैक्षणिक मांगों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया है, जिसके कारण सरकार को कई स्कूल बंद करने पड़े हैं।

फ्रांस में सड़कों पर उतरा छात्रों का गुस्सा

फ्रांस में शुक्रवार का दिन भारी हंगामे और हिंसा के नाम रहा। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर देश भर के लाखों छात्र सड़कों पर उतर आए। देखते ही देखते यह प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां कई स्थानों पर छात्रों ने आगजनी की, स्कूलों के मुख्य द्वारों पर ताले जड़ दिए और जमकर तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच झड़पें हुईं, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम में 2000 से ज्यादा छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हिंसक प्रदर्शनों के कारण सैकड़ों छात्र, शिक्षक और 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

सरकार की आपात बैठक और स्कूल बंद

छात्रों के उग्र होते प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस की स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालात इतने बिगड़ गए कि देश के प्रधानमंत्री को तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय संकट बैठक बुलानी पड़ी। इस स्थिति के चलते सरकार ने सभी मंत्रियों के आधिकारिक दौरों को रद्द कर दिया है। सरकार ने एहतियातन 550 से ज्यादा हाई स्कूलों को अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है। छात्र अपनी शिक्षा प्रणाली में बुनियादी बदलावों की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि मौजूदा समय में स्कूलों में पढ़ाई के घंटे बहुत ज्यादा हैं और उन्हें कम किया जाना चाहिए। इसके अलावा, कक्षाओं में एयर कंडीशनिंग की सुविधा न होने के कारण भीषण गर्मी में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। छात्रों का यह भी आरोप है कि स्कूलों में शिक्षकों द्वारा सही तरीके से नहीं पढ़ाया जा रहा है।

पेरिस से शुरू हुई लहर पूरे फ्रांस में सक्रिय

यह विरोध प्रदर्शन 21 सितंबर को राजधानी पेरिस से शुरू हुआ था, जो बहुत कम समय में पूरे फ्रांस में फैल गया है। वर्तमान में लगभग सभी प्रमुख स्कूलों के छात्र इस आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं। स्कूल, यूनिवर्सिटी और विभिन्न शैक्षणिक संस्थान अब इस असंतोष की आग में झुलस रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांगों में शैक्षणिक बोझ को कम करना और कक्षाओं में एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं मुहैया कराना शामिल है।

पुरानी इमारतों और शिक्षकों की कार्यशैली पर सवाल

छात्रों ने सरकार के सामने बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि स्कूलों की मौजूदा इमारतें जर्जर और पुरानी हो चुकी हैं, इसलिए नई इमारतों का निर्माण किया जाए। इसके साथ ही, शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें छात्रों ने कुछ शिक्षकों की अत्यधिक सख्ती का विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि इसी साल जनवरी के महीने में फ्रांस में किसानों ने भी अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टर मार्च निकाला था और संसद तक प्रदर्शन किया था। अब छात्रों का यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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