18 कैरेट सोने से तैयार फीफा वर्ल्ड कप 2026 ट्रॉफी की असली कीमत कितनी है? खेल एक घंटा पहले 3
11 जून से शुरू हो रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 की 37 सेंटीमीटर ऊंची ट्रॉफी 18 कैरेट सोने से बनी है। जानिए इसमें लगे मटीरियल और नीलामी के आधार पर इसकी कीमत क्या आंकी जाती है।

फुटबॉल का सबसे बड़ा उत्सव यानी फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से शुरू होने जा रहा है। इस बार का संस्करण इसलिए और भी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि किसी एक टीम को साफ तौर पर फेवरेट के रूप में नहीं देखा जा रहा है। अर्जेंटीना मौजूदा चैंपियन के तौर पर मैदान में उतरेगी, वहीं फ्रांस, इंग्लैंड, स्पेन और पुर्तगाल को भी खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

दूसरी ओर, जर्मनी और ब्राजील जैसी दिग्गज टीमों को इस बार दावेदारों की सूची में आगे नहीं रखा जा रहा, हालांकि ये टीमें ट्रॉफी जीतकर सबको चौंकाने का दमखम रखती हैं। सवाल यह है कि जिस ट्रॉफी के लिए ये सभी टीमें अपनी पूरी ताकत झोंक देंगी, उसकी वास्तविक कीमत आखिर है कितनी।

भावनात्मक रूप से अनमोल, पर मटीरियल की कीमत भी कम नहीं

किसी विजेता टीम के लिए इस ट्रॉफी का क्या महत्व होता है, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है। भावनात्मक रूप से यह वाकई अनमोल है। अगर सिर्फ इसमें इस्तेमाल हुए मटीरियल की बात करें तो इसकी कीमत करीब 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर आंकी जाती है।

बीते कुछ महीनों में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में काफी उछाल आया है और ट्रॉफी को आकार देने में बेहद बारीक कारीगरी भी लगती है। यही वजह है कि इसकी असली कीमत इससे कई गुना अधिक मानी जाती है। अगर आज के दौर में इस ट्रॉफी की नीलामी की जाए तो इसकी कीमत आसानी से 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ऊपर पहुंच सकती है।

किस चीज से बनी है यह ट्रॉफी?

37 सेंटीमीटर ऊंची यह ट्रॉफी 18 कैरेट सोने से तैयार की गई है और इसका वजन करीब 6 किलोग्राम है। इसके डिजाइन में दो इंसानों को पृथ्वी को ऊपर उठाए हुए दर्शाया गया है। यह आकृति इस बात को बखूबी बयां करती है कि फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल क्यों है।

दिलचस्प बात यह है कि यह ट्रॉफी पूरी तरह ठोस नहीं है, बल्कि अंदर से खोखली है। अगर यह पूरी तरह सोने की बनी होती तो खिलाड़ियों के लिए इसे उठाना बेहद कठिन हो जाता। इसके आधार यानी बेस में मलेचाइट नाम का हरे रंग का अर्ध-कीमती पत्थर दो परतों में लगाया गया है।

1930 से शुरू हुआ सफर

इस टूर्नामेंट का पहला आयोजन 1930 में हुआ था और मौजूदा ट्रॉफी को इटली के मूर्तिकार सिल्वियो गज्जानीगा ने डिजाइन किया था। इससे पहले की ट्रॉफी, यानी जूल्स रिमे ट्रॉफी, ब्राजील को स्थायी रूप से सौंप दी गई थी, जब उसने 1970 में मेक्सिको में तीसरी बार वर्ल्ड कप अपने नाम किया था।

मौजूदा ट्रॉफी को पहली बार 1974 में वेस्ट जर्मनी ने जीता था। उस समय टीम की कमान दिग्गज डिफेंडर फ्रांज बेकेनबावर के हाथों में थी। गौरतलब है कि ब्राजील की टीम इस टूर्नामेंट को सबसे ज्यादा 5 बार जीत चुकी है।

विजेताओं को असली नहीं, रेप्लिका ट्रॉफी मिलती है

बहुत कम लोग जानते हैं कि जीतने वाली टीमों को असली ट्रॉफी नहीं दी जाती। फीफा असली ट्रॉफी पर बेहद सख्त निगरानी रखता है और फाइनल खत्म होते ही इसे अपने मुख्यालय ज्यूरिख वापस भेज दिया जाता है।

इसके बदले विजेता देश को सोने की परत चढ़ी कांस्य की रेप्लिका ट्रॉफी सौंपी जाती है, जिसे टीमें अपने देश लेकर जा सकती हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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