पशुपालकों के लिए बड़ी खबर: खुरहा-मुंहपका बीमारी से बचाने के लिए विभाग चला रहा मुफ्त टीकाकरण अभियान भारत 10 घंटे पहले 4
सीतामढ़ी समेत पूरे बिहार में मवेशियों को खुरहा-मुंहपका रोग से सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग निशुल्क टीकाकरण अभियान चला रहा है, जिसमें पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है।

पशुपालन विभाग की विशेष मुहिम

बिहार के सीतामढ़ी जिले सहित पूरे राज्य में पशुपालन विभाग द्वारा मवेशियों के लिए एक महत्वपूर्ण और निशुल्क टीकाकरण अभियान का संचालन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुओं को खुरहा और मुंहपका जैसी घातक बीमारियों से सुरक्षित रखना है। यह पहल विशेष रूप से उन मवेशियों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है जो दुधारू हैं या जिनकी उम्र कम है। विभाग द्वारा यह अभियान 10 जुलाई से प्रभावी रूप से शुरू किया गया है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण और टीकाकरण किया जा रहा है।

बीमारी का खतरा और गंभीर परिणाम

जिला पशु पालन पदाधिकारी प्रेम कुमार झा ने इस रोग की भयावहता पर चिंता जाहिर की है। उनके अनुसार, खुरहा-मुंहपका एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है, जो मवेशियों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है। यदि समय रहते इस बीमारी की रोकथाम नहीं की गई, तो यह तेजी से पूरे क्षेत्र के पशुओं में फैल सकती है।

विशेष रूप से युवा बछड़ियों (बाछियों) के लिए यह बीमारी अत्यंत घातक मानी जाती है। यदि कम उम्र की बछियां इस संक्रमण की शिकार हो जाती हैं, तो उनमें प्रजनन से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, इससे बाछियों में बार-बार गर्भ न ठहरने यानी रिपीट ब्रीडिंग की समस्या हो जाती है। इसके अलावा, संक्रमण की स्थिति में अचानक गर्भपात होने का खतरा भी बना रहता है, जो पशुपालकों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। चूँकि यह एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए केवल टीकाकरण ही इसके प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी और विश्वसनीय तरीका है।

टीकाकरण की डिजिटल प्रक्रिया

सरकार ने इस अभियान को पूरी तरह से पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए इसे डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया है। अब टीकाकरण के लिए पशुपालकों को एक तकनीकी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है:

  • सबसे पहले पशुपालक का मोबाइल नंबर ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है।
  • रजिस्ट्रेशन के दौरान पशुपालक के मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाता है।
  • पोर्टल पर इस ओटीपी को दर्ज करने के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण मानी जाती है।
  • पंजीकरण सफल होने के बाद ही विभागीय टीम संबंधित मवेशी को टीका लगाती है।
  • पूरी प्रक्रिया का विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाता है, जिससे विभाग मवेशियों की टीकाकरण स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकता है।

पशुपालकों के लिए अहम सलाह

विभाग ने पशुपालकों के बीच फैले कुछ भ्रामक विचारों को भी स्पष्ट किया है। प्रेम कुमार झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह टीकाकरण केवल स्वस्थ मवेशियों के लिए ही सुरक्षित है। बीमार या पहले से ही संक्रमित पशुओं को यह टीका नहीं लगाया जाना चाहिए। स्वस्थ जानवरों को टीका लगाने से उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी का विकास होता है, जिससे वे भविष्य में इस वायरस के घातक हमले से सुरक्षित रहते हैं। विभाग ने क्षेत्र के सभी पशुपालकों और किसानों से आह्वान किया है कि वे आगे आएं और अपने पशुओं को इस निशुल्क अभियान के माध्यम से सुरक्षित बनाकर अपनी आजीविका को संरक्षित करें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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