राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों और नेताओं की पहली तस्वीर अब सार्वजनिक हो गई है। इस तस्वीर में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर कई नेता एक साथ बैठे नजर आ रहे हैं। तस्वीर में जहां यूसुफ पठान दिखाई दे रहे हैं, वहीं सुदीप बंद्योपाध्याय भी मौजूद हैं। इनके साथ 6 अन्य महिला सांसद भी हैं, जिनमें सयोनी घोष और शताब्दी रॉय शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में कुल 19 सांसद शरीक हुए। मुलाकात के बाद सभी सांसद वहां से रवाना भी हो चुके हैं।
सभी सांसद पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर इकट्ठा हुए और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निवास की ओर बढ़े। दरअसल, बागी गुट ने एक अलग संसदीय समूह के तौर पर मान्यता हासिल करने के लिए अपना दावा सामने रखा है। भूपेंद्र यादव के घर हुई इस बैठक में शामिल होने वालों में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, सायोनी घोष, माला रॉय, बापी हलदर और प्रसून बनर्जी भी रहे। इनके साथ बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की भी मौजूदगी रही।
22 सांसदों के समर्थन का दावा
इससे पहले काकोली घोष दस्तीदार ने यह दावा किया था कि दो और सांसद उनके पाले में आ गए हैं, जिससे उनका कुल आंकड़ा बढ़कर 22 तक पहुंच गया है। अब इस गुट की मांग है कि स्पीकर उन्हें लोकसभा और राज्यसभा में एक अलग समूह के रूप में मान्यता प्रदान करें।
ममता की पार्टी का स्पीकर को पत्र
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के समर्थक नेताओं ने स्पीकर को एक पत्र सौंपा है। पत्र देने के बाद बाहर निकलीं टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि उन्होंने स्पीकर को लिखकर अवगत कराया है कि जो लोग इस तरह टीएमसी को तोड़ना चाहते हैं और लोकसभा के भीतर अलग से एकजुटता बनाना चाहते हैं, वह संविधान के पूरी तरह खिलाफ है।
संविधान इसकी बिल्कुल अनुमति नहीं देता है। यह कानून के विपरीत है।
कीर्ति आजाद का बयान
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि यह मामला पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की राय और 10वीं अनुसूची के आर्टिकल 4 में भी इसका उल्लेख है कि पार्टी में किसी तरह का विभाजन नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में जो हुआ, वह गलत था। इसीलिए हम इस मामले में एक अर्जी लेकर यहां पहुंचे थे और हमने स्पीकर को अर्जी सौंप दी है। हमें पूरा विश्वास है कि स्पीकर नियमों के अनुसार ही फैसला लेंगे, जैसा कि वे अब तक करते आए हैं।"
टीएमसी ने स्पीकर के सामने रखी मांगें
टीएमसी ने लोकसभा स्पीकर से आग्रह किया है कि इस पत्र को सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। पार्टी का कहना है कि सदन में टीएमसी को सिर्फ उसके अधिकृत नेता और व्हिप के जरिए ही मान्यता दी जाए तथा पार्टी से अलग किसी कथित गुट या समूह को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दी जाए।
पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि यदि किसी अलग गुट की ओर से कोई पत्र या दावा आता है, तो उस पर निर्णय लेने से पहले टीएमसी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही टीएमसी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सभी कानूनी अधिकार सुरक्षित रखती है। अगर किसी सांसद या नेता की गतिविधि दल-बदल विरोधी कानून यानी संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लंघन करती पाई गई, तो पार्टी उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू कर सकती है।
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने भी स्पीकर के समक्ष लगभग यही आग्रह रखा है। उन्होंने कहा कि सदन में टीएमसी की पहचान केवल पार्टी के अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से ही होनी चाहिए और किसी अलग गुट को मान्यता देने से पहले पार्टी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने भी यह स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर पार्टी दल-बदल विरोधी कानून के तहत कानूनी कदम उठा सकती है।
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