मनोरंजन
2 घंटे पहले
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विचारों
इंसानी जज्बातों और अधूरेपन को परदे पर पूरी शिद्दत के साथ उकेरने वाले मंझे हुए निर्देशक इम्तियाज अली एक बार फिर दर्शकों के मन को झकझोरने के लिए हाजिर हैं। उनकी नई पेशकश 'मैं वापस आऊंगा' बंटवारे के खौफ में गुम हुए अस्तित्व और अधूरी मोहब्बत का एक खामोश दस्तावेज है।
बंटवारे के बीच पनपा एक रिश्ता
पहाड़ों और अनजानी राहों पर प्रेम कहानियां बुनने के लिए मशहूर इम्तियाज ने इस बार एक ऐसे रिश्ते की कहानी कही है, जो बंटवारे की त्रासदी के बीच जन्म लेता है। इतिहास की इस सबसे खूनी त्रासदी की पृष्ठभूमि में पनपा यह दर्द ऐसा है, जो अंत तक बना रहता है और दिल पर गहरा असर छोड़ जाता है।
कहां चूक गई फिल्म
भावनाओं की गहराई के बावजूद फिल्म की बेहद सुस्त रफ्तार दर्शकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेती है। यही धीमापन इस संवेदनशील कहानी के असर को कुछ हद तक कमजोर कर देता है।
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