रिव्यू: बंटवारे के मौन दर्द को बयां करती इम्तियाज अली की 'मैं वापस आऊंगा' मनोरंजन 2 घंटे पहले 1
इम्तियाज अली की नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' बंटवारे की त्रासदी के बीच पनपे एक अधूरे प्रेम और खोए हुए वजूद की मौन दास्तान है, हालांकि इसकी बेहद धीमी रफ्तार दर्शकों के सब्र की परीक्षा लेती है।

इंसानी जज्बातों और अधूरेपन को परदे पर पूरी शिद्दत के साथ उकेरने वाले मंझे हुए निर्देशक इम्तियाज अली एक बार फिर दर्शकों के मन को झकझोरने के लिए हाजिर हैं। उनकी नई पेशकश 'मैं वापस आऊंगा' बंटवारे के खौफ में गुम हुए अस्तित्व और अधूरी मोहब्बत का एक खामोश दस्तावेज है।

बंटवारे के बीच पनपा एक रिश्ता

पहाड़ों और अनजानी राहों पर प्रेम कहानियां बुनने के लिए मशहूर इम्तियाज ने इस बार एक ऐसे रिश्ते की कहानी कही है, जो बंटवारे की त्रासदी के बीच जन्म लेता है। इतिहास की इस सबसे खूनी त्रासदी की पृष्ठभूमि में पनपा यह दर्द ऐसा है, जो अंत तक बना रहता है और दिल पर गहरा असर छोड़ जाता है।

कहां चूक गई फिल्म

भावनाओं की गहराई के बावजूद फिल्म की बेहद सुस्त रफ्तार दर्शकों के धैर्य की कड़ी परीक्षा लेती है। यही धीमापन इस संवेदनशील कहानी के असर को कुछ हद तक कमजोर कर देता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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