धर्म
3 घंटे पहले
3
विचारों
Somvati Amavasya 2026: जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन आती है तो उसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को देवों के देव महादेव की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। साथ ही अमावस्या का दिन पितरों की पूजा, तर्पण, जप-तप, दान और गंगा स्नान के लिहाज से भी बेहद शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन ये सभी कार्य करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और पूर्वजों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस साल सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह दिन अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग वाला रहेगा। आइए जानते हैं कि इस अवसर पर भगवान शिव की पूजा किस विधि और मुहूर्त में करनी चाहिए।
सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा विधि
- सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद सोमवती अमावस्या व्रत रखने का संकल्प लें।
- शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
- शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल अर्पित करें, फिर क्रमश: दूध, दही, घी, शहद और चीनी चढ़ाएं। इसके बाद एक बार फिर शुद्ध जल से शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
- अब शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, श्वेत चंदन, अक्षत (साबुत चावल) और आंकड़े के फूल अर्पित करें।
- इसके साथ ही माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री भेंट करें।
- अंत में कपूर और घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
सोमवती अमावस्या पर शिवजी के इन मंत्रों का करें जाप
ॐ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
ॐ नमः शिवाय
सोमवती अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगा और इसका समापन 15 जून को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान-दान और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 03 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
सोमवती अमावस्या 2026 शुभ संयोग
इस बार सोमवती अमावस्या पर कई शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं। यह सोमवती अमावस्या अधिकमास में पड़ रही है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। ऐसे में इस दिन स्नान और दान करना अत्यंत फलदायी तथा पुण्यकारी माना गया है। इसके अलावा इस दिन मिथुन संक्रांति का योग भी बन रहा है, क्योंकि सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे। साथ ही 15 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग भी बनेगा, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है।
Comments
0 comment