मासिक दुर्गाष्टमी 22 जून को, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा करने का सही तरीका धर्म एक महीने पहले 49
हर महीने आने वाली मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत इस बार 22 जून को मनाया जाएगा। मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से पूजा और मंत्रों का जाप करते हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व

हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। माना जाता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और देवी की आराधना करते हैं, उनके जीवन के तमाम कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस वर्ष यह व्रत 22 जून को रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 21 जून को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से होगी, जो कि 22 जून को दोपहर 03 बजकर 39 मिनट तक रहेगी। पूजा के लिए विशेष समय इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक।
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक।

पूजा करने की सरल विधि

दुर्गाष्टमी के दिन माता रानी का आशीर्वाद पाने के लिए आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:

  • प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और एक चौकी पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाकर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • माता रानी को लाल फूल, चुनरी, अक्षत और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • भोग के रूप में फल, मेवा, मिठाई, खीर या हलवा चढ़ाएं।
  • शुद्ध देशी घी का दीपक जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती संपन्न करें।

माता रानी के मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है:

  • सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके, शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
  • ऊँ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते।
  • या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
  • या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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