गायत्री जयंती 2026: जानिए कब है माता गायत्री का पावन पर्व, पूजा की सही विधि और शुभ मुहूर्त धर्म एक महीने पहले 49
गायत्री जयंती का दिन मां गायत्री की आराधना के लिए बेहद खास माना गया है। वर्ष 2026 में यह उत्सव कब मनाया जाएगा और पूजा के लिए कौन से समय सबसे उपयुक्त हैं, इसकी पूरी जानकारी यहां प्राप्त करें।

गायत्री जयंती 2026 की सही तिथि और मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्री जयंती का पर्व मुख्य रूप से ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में इसे श्रावण पूर्णिमा के दिन भी मनाने की परंपरा है। वर्ष 2026 में गायत्री जयंती 25 जून 2026 को मनाई जाएगी। पूजा के लिए भक्तों के पास कुछ विशेष शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।

पूजा के लिए शुभ समय इस प्रकार हैं:

  • प्रथम शुभ मुहूर्त: सुबह 05:25 से 07:10 बजे तक।
  • द्वितीय शुभ मुहूर्त: सुबह 10:39 से दोपहर 02:09 बजे तक।
  • स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 से 04:45 बजे तक।

पूजा की विधि और नियम

गायत्री जयंती के दिन माता की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त इन नियमों का पालन कर सकते हैं:

  • पवित्र नदी में स्नान करें और दिनभर के व्रत का संकल्प लें।
  • मां गायत्री की विधिवत पूजा अर्चना करें और श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र का जाप करें।
  • मां की चालीसा का पाठ करें, यह अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
  • भक्त इस दिन श्री आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
  • पूजा का समापन माता की आरती के साथ करें।
  • दान-पुण्य का इस दिन विशेष महत्व है। इस अवसर पर गेहूं, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गायत्री मंत्र का महत्व

इस पावन अवसर पर कम से कम 108 बार गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि नियमित रूप से इस मंत्र के जाप से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

मंत्र: ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

गायत्री जयंती का आध्यात्मिक महत्व

मां गायत्री को त्रिमूर्ति के स्वरूप में देखा जाता है, जिन्हें देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी और देवी पार्वती का अवतार माना गया है। इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की आराध्या भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त गायत्री जयंती पर पूरी श्रद्धा के साथ माता की उपासना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। इस दिन साधना करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मीरा शर्मा पाबना की धर्म एवं संस्कृति लेखिका हैं, जो त्योहार, धर्म, ज्योतिष और परंपराओं पर लिखती हैं। व्रत-त्योहारों के महत्व, पूजा विधि और आस्था से जुड़े विषयों को वे श्रद्धा और जानकारी के साथ पेश करती हैं। वाराणसी से उनका जुड़ाव उनके लेखन में झलकता है।

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