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5 घंटे पहले
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Parama Ekadashi 2026 Date: इस समय अधिकमास यानी मलमास चल रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यही वजह है कि अधिकमास में आने वाली हर एकादशी का व्रत विशेष फलदायी होता है। इन्हीं में परम एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। खास बात यह है कि यह एकादशी हर 3 साल में एक बार ही आती है, इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने वाले भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। परम एकादशी का व्रत अधिक माह के कृष्ण पक्ष की तिथि को रखा जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और मंत्रों के बारे में।
परम एकादशी 2026 व्रत तिथि
पंचांग के अनुसार अधिकमास ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 11 जून को मध्यरात्रि 12 बजकर 57 मिनट पर होगा और इसका समापन उसी दिन यानी 11 जून को रात 10 बजकर 36 मिनट पर हो जाएगा। उदयातिथि के अनुसार परम एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा।
परम एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:34 ए एम से 05:17 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:12 पी एम से 01:05 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:51 पी एम से 03:44 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 07:15 पी एम से 07:36 पी एम
परम एकादशी 2026 पारण तिथि
- परम एकादशी पारण तिथि- 12 जून 2026
- पारण का शुभ समय- 06:00 ए एम से 08:40 ए एम
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 07:36 पी एम
भगवान विष्णु के चमत्कारी मंत्र
विष्णु मूल मंत्र- ॐ नमोः नारायणाय॥
विष्णु भगवते वासुदेवाय मंत्र- ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु गायत्री मंत्र- ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णु मंत्र- मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
भगवान विष्णु का मूल मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
विष्णु ध्यान मंत्र- शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
परम एकादशी व्रत का महत्व
परम एकादशी का व्रत 3 साल में केवल एक बार आता है, इसी कारण इसका धार्मिक महत्व बाकी सभी एकादशियों की तुलना में कहीं अधिक बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को कई गुना अधिक फल मिलते हैं, उसके धन और संपत्ति में वृद्धि होती है तथा दरिद्रता सदा के लिए दूर हो जाती है। इस दिन तुलसी पूजा का भी खास महत्व होता है। हालांकि ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी को न तो स्पर्श करें और न ही उसमें जल चढ़ाएं। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेने चाहिए।
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