उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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फतेहपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 10 जून यानी बुधवार की दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अपने ऊपर डीजल उड़ेलकर जान देने पर उतारू हो गई। वह माचिस जलाने ही जा रही थी कि वहां तैनात होमगार्ड जवानों ने फुर्ती दिखाते हुए उसके हाथ से डीजल की बोतल और माचिस छीन ली। जवानों की इसी सतर्कता के चलते एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
होमगार्ड की फुर्ती ने टाल दिया बड़ा हादसा
घटना के तुरंत बाद पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी फैल गई और वहां मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे। सूचना मिलते ही एसडीएम समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे और महिला को समझा-बुझाकर शांत कराने में जुट गए। महिला की पहचान खागा तहसील क्षेत्र के हसनपुर अकोढ़िहा गांव की रहने वाली लीलावती पत्नी शिवचरण के रूप में हुई। जिलाधिकारी को सौंपे अपने प्रार्थना पत्र में महिला ने आरोप लगाया कि करीब 24 साल पहले उसकी शादी हुई थी और विवाह के दो साल बाद वह अपने पति के साथ मायके लोधी का पुरवा गांव में रहने लगी थी।
लीलावती के मुताबिक, उसके छोटे भाई प्रमोद कुमार की तबीयत लंबे समय से खराब रहती थी और वह अविवाहित था। भाई के इलाज के लिए उसने समूह से 6 लाख रुपये निकालकर मदद की थी। महिला का दावा है कि मृत्यु से पहले भाई ने स्टाम्प पेपर पर लिखापढ़ी कर अपने हिस्से का मकान उसके नाम कर दिया था, जहां वह पिछले 20 साल से अपने परिवार के साथ रह रही थी। उसने आरोप लगाया कि बीते साल 13 नवंबर को जब वह परिवार समेत एक कार्यक्रम में गई हुई थी, उसी दौरान उसके तीन भाइयों ने मकान का ताला तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया। लौटने पर उसे घर में घुसने तक नहीं दिया गया।
मकान छिनने के बाद झोपड़ी में गुजर-बसर
लीलावती ने बताया कि उसकी तीन बेटियां विवाह योग्य हैं और पति मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। मकान छिन जाने के बाद पूरा परिवार झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर है। महिला का कहना है कि वह पिछले दो साल से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रही है, पर कहीं उसकी सुनवाई नहीं हुई। हताश होकर वह करीब 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय पहुंची और आत्मदाह का कदम उठाने की कोशिश की।
होमगार्ड जवानों ने बताया कि महिला ने जैसे ही अपने ऊपर डीजल डाला, उन्होंने तत्काल माचिस और बोतल छीनकर उसकी जान बचा ली। हालांकि इस पूरे प्रकरण पर प्रशासनिक अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आए।
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