खेती की बदलती तस्वीर: बुरहानपुर के किसान ने अपनाया मिक्स फार्मिंग का तरीका, लाखों में हो रही है सालाना कमाई मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर मिश्रित खेती का रुख किया है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मात्र 6 एकड़ जमीन पर वे न केवल अपना गुजारा कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।

बुरहानपुर के किसान की सफलता की कहानी

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला अपनी कृषि पद्धतियों में आ रहे सकारात्मक बदलावों के लिए जाना जा रहा है। यहां के किसान अब पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर प्रयोग कर रहे हैं। इसी कड़ी में बुरहानपुर मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बहादरपुर गांव के निवासी किसान अकील की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। अकील ने मिक्स फार्मिंग यानी मिश्रित खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।

खेती की बारीकियां और शिक्षा

अपनी सफलता के बारे में बताते हुए अकील साझा करते हैं कि उनकी औपचारिक शिक्षा केवल कक्षा चौथी तक ही सीमित रही। पढ़ाई में मन नहीं लगने के कारण वे बचपन से ही अपने पिता के साथ खेतों में चले जाते थे। खेती के गुण उन्होंने अपने पिता से ही सीखे हैं, जो आज उनके जीवन में काम आ रहे हैं। अकील का मानना है कि किताबी ज्ञान से कहीं अधिक खेतों की मिट्टी की समझ उनके काम आई है। उन्होंने बताया कि अब वे अपनी स्वयं की 3 एकड़ जमीन के साथ ही दूसरे की 3 एकड़ जमीन को मिलाकर कुल 6 एकड़ क्षेत्र में खेती करते हैं।

मिश्रित खेती का मॉडल

पहले उनका परिवार मुख्य रूप से केवल केले की खेती पर ही निर्भर था, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी तकनीक में बदलाव किया है। अब अकील एक ही खेत में कई तरह की फसलें उगा रहे हैं। वे केले के साथ-साथ सोयाबीन, मक्का, चना और तुवर जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपने खेतों में अलग-अलग प्रकार की सब्जियां भी लगाई हैं। इस विविधतापूर्ण खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उन्हें बाजार में अच्छी मांग मिल रही है और जोखिम भी कम हो गया है।

लागत और शानदार मुनाफा

अपनी आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए किसान ने बताया कि 6 एकड़ भूमि पर खेती करने के लिए उन्हें प्रति वर्ष लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये की लागत आती है। इस निवेश के बदले वे सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई कर लेते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के मौसम में वे कपास की फसल भी लगाते हैं। हालांकि, कई बार आंधी, तूफान और भारी बारिश के कारण केले की फसल को नुकसान भी होता है, जिससे कभी-कभी लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके, वे पिछले 10 वर्षों से लगातार खेती के क्षेत्र में डटे हुए हैं और इसे ही अपनी जीविका का मुख्य साधन बनाए हुए हैं।

रोजगार का जरिया

इस सफलता की एक और बड़ी बात यह है कि अकील स्वयं तो लाभ कमा ही रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने खेत में क्षेत्र के 8 से 10 अन्य लोगों को रोजगार भी प्रदान किया है। उनका मानना है कि आने वाले समय में उनका लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। बुरहानपुर के इस किसान का अनुभव साबित करता है कि यदि सही योजना और मेहनत के साथ कृषि की जाए, तो छोटे किसान भी अपनी किस्मत बदल सकते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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