हरियाणा
3 घंटे पहले
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फसल कटाई से ठीक पहले मौसम की मार
हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले दयालपुर गांव में किसानों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं। धान की फसल जो कुछ दिनों बाद मंडियों में पहुंचने वाली थी, उसे देर रात हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि उनकी तैयार फसल खेतों में ही बिछ गई है। धान की कटाई में अब बमुश्किल 10 से 15 दिन का समय ही शेष था, लेकिन प्रकृति की इस मार ने सब कुछ बदल कर रख दिया है।
प्रति एकड़ 20 हजार की लागत पर संकट
स्थानीय किसान पदम सिंह ने अपने दुख साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 4 एकड़ जमीन पर 1509 किस्म का धान उगाया था। पदम सिंह के अनुसार, खेत में लगी पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है और वे फिलहाल इसे लगभग 40 प्रतिशत के नुकसान के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धान की खेती के लिए एक एकड़ में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है। जब फसल पूरी तरह पककर कटाई के मुहाने पर होती है, तब इस तरह का नुकसान किसान की कमर तोड़ देता है।
पैदावार और बाजार भाव, दोनों पर असर
किसानों के अनुसार, इस प्रतिकूल मौसम का सीधा असर उनकी पैदावार की गुणवत्ता और मंडी में मिलने वाले दाम दोनों पर पड़ेगा। पदम सिंह ने समझाया कि जो धान खेत में जमीन पर गिर गया है, उसके दाने पूरी तरह से पक नहीं पाएंगे। इसके अलावा, नमी और जमीन के संपर्क में रहने के कारण कुछ दाने काले भी पड़ सकते हैं। इससे उन्हें बाजार में धान का वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा। इस साल की शुरुआत में गेहूं की फसल के दौरान भी किसानों को अंत समय में इसी तरह के मौसमी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा था।
कृत्रिम बारिश का दावा
इस पूरे मामले पर किसान नेता बबलू हुड्डा ने एक अलग और गंभीर तर्क पेश किया है। बबलू हुड्डा का मानना है कि यह केवल सामान्य बारिश नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि यह एक तरह की कृत्रिम बारिश थी जिसमें केमिकल का उपयोग किया गया था। बबलू हुड्डा के अनुसार, इस केमिकल युक्त बारिश का दुष्प्रभाव सीधे तौर पर धान की खड़ी फसल पर पड़ा है। हालांकि, यह उनका निजी दावा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इससे किसानों की परेशानियां कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।
नुकसान के आकलन में जुटे किसान
दयालपुर गांव के प्रभावित किसान अब अपने-अपने खेतों में पहुंचकर हुए कुल नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं। पूरे साल कड़ी मेहनत और भारी भरकम खर्च करने के बाद जब फसल के परिणाम का समय आता है, तब मौसम की ऐसी अनिश्चितता पूरे परिवार की उम्मीदों को चकनाचूर कर देती है। फसल तैयार होने के आखिरी चरण में हुई इस तबाही ने न केवल किसानों की लागत को जोखिम में डाल दिया है, बल्कि उनके चेहरे पर मायूसी भी ला दी है। अब किसान इस बात को लेकर सशंकित हैं कि मंडी में जब वे अपनी बची हुई फसल लेकर पहुंचेंगे, तो उन्हें किस तरह का समर्थन मूल्य या भाव मिलेगा।
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