बिहार
एक घंटा पहले
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बिहार में चक्रवात अर्णब का असर हुआ धीमा
बिहार राज्य में पिछले 72 घंटे से लगातार बारिश और तूफान के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त रहा है, लेकिन अब राहत की खबर सामने आई है। चक्रवात अर्णब का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आज 27 सितंबर, रविवार से राज्य के किसी भी जिले के लिए भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रदेश भर में मौसम के अब सामान्य होने की पूरी संभावना है। हालांकि, पटना सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की फुल्की बारिश या गरज-चमक के साथ फुहारें देखी जा सकती हैं।
30 सितंबर तक रहेगा बारिश का दौर धीमा
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आज 27 सितंबर से लेकर 30 सितंबर तक बारिश की गतिविधियों में काफी कमी आएगी। इस दौरान राज्य के अधिकांश जिलों में तेज धूप निकलने के आसार हैं, जिससे लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। बारिश थमने के साथ ही तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। आंकड़ों पर गौर करें तो 28 सितंबर को राजधानी पटना का अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं 29 सितंबर और 30 सितंबर को भी तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। आपको याद होगा कि इस चक्रवाती तूफान के प्रभाव के कारण बीते दिनों राज्य का अधिकतम तापमान गिरकर 25 डिग्री सेल्सियस के करीब आ गया था।
बीते 24 घंटों का बारिश का लेखा-जोखा
अगर बीते 24 घंटे के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सबसे अधिक बारिश खगड़िया जिले में दर्ज की गई है। वहां औसत से 474 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। इसके अलावा सीवान और बेगूसराय में भी 450 प्रतिशत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। मुंगेर जिले की स्थिति भी ऐसी ही रही जहां औसत से 339 प्रतिशत से अधिक वर्षा हुई है। पटना सहित प्रदेश के 6 जिलों में बीते 24 घंटे के दौरान तेज बारिश हुई और दिनभर काले बादल छाए रहे। शनिवार को राज्य का सबसे अधिक तापमान पूर्णिया में 33.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अन्य प्रमुख शहरों के तापमान की बात करें तो भागलपुर में 31.8 डिग्री, कैमूर में 31.1 डिग्री, गया में 31 डिग्री, दरभंगा में 29.1 डिग्री और पटना में 27.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।
चक्रवात अर्णब का वैज्ञानिक कारण
आखिर चक्रवात अर्णब के कारण इतनी भारी बारिश क्यों हुई, इसे समझना जरूरी है। इस चक्रवात का प्रभाव बंगाल की खाड़ी से शुरू हुआ था। वहां पहले कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ, जो बाद में मजबूती हासिल करके एक चक्रवाती सिस्टम में तब्दील हो गया। इसके प्रभाव से भारी नमी बिहार की ओर पहुंची। इसी दौरान उत्तर भारत में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी मौजूद था, जिसने इस नमी को भारी बारिश में बदल दिया। इन दोनों मौसमी प्रणालियों के आपस में मिल जाने के कारण ही बिहार में पिछले तीन दिनों तक 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और मूसलाधार बारिश हुई।
बाढ़ का कहर और नदियों की स्थिति
बारिश की तीव्रता भले ही कम हो गई हो, लेकिन राज्य की नदियां अभी भी उफान पर हैं और बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कोसी और बागमती नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जबकि गंडक नदी का जलस्तर भी निरंतर बढ़ रहा है। सुपौल के 50 गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी घुसा हुआ है, जिससे स्थानीय लोग संकट में हैं। शनिवार को पटना के कंकड़बाग, डाकबंगला चौराहा, जंक्शन, राजेंद्र नगर, राजीव नगर और इंद्रपुरी जैसे इलाकों में भारी जलजमाव की स्थिति बन गई। बाढ़ प्रभावित दियारा इलाके में 1 किलोमीटर के दायरे में भीषण नदी कटाव हो रहा है, जिससे चिरैया गांव पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, बांका के पौकरी गांव के पास बदुआ नदी में एक विशाल मगरमच्छ दिखने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है।
मानसून का कुल बारिश का आंकड़ा
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दिनों की तीव्र बारिश के बावजूद पूरे मानसून सीजन में बिहार में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से नीचे ही है। राज्य में अब तक 968.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक दर्ज बारिश केवल 657.9 मिमी रही है। इस प्रकार बिहार में अब तक सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
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