फरीदाबाद में चला बुलडोजर: 30 लाख का प्लॉट और 40 लाख का मकान पल भर में हुआ मलबे में तब्दील हरियाणा एक घंटा पहले 2
फरीदाबाद के कार्तिक एन्क्लेव में प्रशासन द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई से कई परिवारों के आशियाने उजड़ गए हैं। प्रभावित निवासी अब प्रशासन से अपने नुकसान का जवाब मांग रहे हैं।

कार्तिक एन्क्लेव में मलबे में तब्दील हुए सपने

फरीदाबाद के साहुपुरा स्थित कार्तिक एन्क्लेव में प्रशासन के बुलडोजर ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी है। यहाँ चारों तरफ फैली टूटी हुई दीवारें और मलबा उस दर्द को बयां कर रहा है, जिसे स्थानीय लोग झेल रहे हैं। दशकों की मेहनत से खड़ा किया गया आशियाना कुछ ही घंटों में जमींदोज कर दिया गया, जिसके बाद प्रभावित परिवार गहरे सदमे में हैं।

50 साल का संघर्ष और लाखों का नुकसान

इस इलाके की निवासी मीना बताती हैं कि वह यहाँ पिछले 50 सालों से रह रही हैं। उन्होंने बताया कि जिस जगह पर उन्होंने अपना घर बनाया था, वह एक पुरानी कॉलोनी थी। मीना ने करीब 10 साल पहले 30 लाख रुपये खर्च करके प्लॉट खरीदा था और मकान बनाने में अतिरिक्त 40 लाख रुपये का निवेश किया था। उन्होंने कहा कि भाई के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत करके और कर्ज लेकर उन्होंने यह घर बनाया था, लेकिन अब वे खुद को सड़क पर महसूस कर रही हैं।

बिना चेतावनी का आरोप

पीड़ित परिवारों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि उन्हें कार्रवाई से पहले कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। मीना का कहना है कि अगर उन्हें समय पर नोटिस मिलता तो वे कम से कम अपना सामान तो सुरक्षित बाहर निकाल लेते। अचानक पहुंची मशीनों ने पूरे घर को मलबे में बदल दिया। उन्होंने सवाल उठाया है कि उनकी जीवनभर की कमाई का आखिर कौन जवाब देगा।

प्रशासन का पक्ष

जिला नगर योजनाकार विभाग के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक अवैध कॉलोनी के विरुद्ध की गई थी। विभाग का दावा है कि राजस्व संपदा क्षेत्र में करीब 1.2 एकड़ भूमि पर अवैध रूप से कॉलोनी विकसित की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान विभाग ने 6 निर्माणाधीन ढांचे, 3 चहारदीवारी और 20 डीपीसी को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित लोगों को पहले ही नियमानुसार नोटिस जारी कर दिए गए थे और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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