फरीदाबाद: बल्लभगढ़-सोहना रेलवे पुल बना हादसों का सबब, परसों हुई मरम्मत और आज फिर उखड़ गई सड़क हरियाणा एक घंटा पहले 2
फरीदाबाद में बल्लभगढ़-सोहना रेलवे ओवरब्रिज की हालत बदहाल हो चुकी है, जहां बार-बार होने वाला अस्थाई पैचवर्क कुछ ही दिनों में उखड़ जाता है और गहरे गड्ढों के कारण रोजाना राहगीर चोटिल हो रहे हैं।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक, बल्लभगढ़-सोहना रेलवे पुल इन दिनों वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। बरसात के इस मौसम में इस ओवरब्रिज की सड़क की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि यहां से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है। सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे हर रोज हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। यह मार्ग इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आगे जाकर टोल रोड से जुड़ता है और यहां से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। लेकिन वर्तमान में इसकी बदहाली के कारण सुबह-शाम लोगों को लंबे ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय लोगों के अनुसार इस सड़क की हर दो-तीन दिन में मरम्मत की जाती है, लेकिन वह महज खानापूर्ति बनकर रह जाती है और पहली ही बारिश में सड़क फिर से उखड़ जाती है।

कैमरे के सामने हुआ हादसा, बाल-बाल बचा बाइक सवार

इस ओवरब्रिज की जमीनी हकीकत उस समय पूरी तरह उजागर हो गई जब इस मार्ग की स्थिति का जायजा लिया जा रहा था। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ही एक युवक अपनी भारी बुलेट बाइक के साथ असंतुलित होकर एक गहरे गड्ढे में गिर पड़ा। यह पूरा हादसा कैमरे में भी कैद हो गया। गनीमत यह रही कि पीछे से आ रहे अन्य वाहनों की रफ्तार धीमी थी, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया। वहां मौजूद स्थानीय नागरिकों का कहना था कि जब कैमरे के सामने ऐसा गंभीर हादसा हो सकता है, तो आम दिनों में न जाने कितने लोग इन जानलेवा गड्ढों के कारण गिरकर चोटिल होते होंगे। बारिश के दौरान जब सड़क पर पानी भर जाता है, तो गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है, जिससे खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

गंदगी और पानी के ऊपर ही बिछा देते हैं तारकोल

सड़क के बार-बार टूटने के पीछे की मुख्य वजह निर्माण कार्य में बरती जा रही भारी लापरवाही है। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के काम करने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

  • घटिया निर्माण तकनीक: स्थानीय निवासी विनोद कुमार ने बताया कि इस सड़क पर परसों ही पैचवर्क का काम किया गया था और उससे करीब एक सप्ताह पहले भी इसकी मरम्मत हुई थी। लेकिन हर बार नतीजा शून्य ही रहता है।
  • सफाई का अभाव: सड़क पर जमा गंदगी, कीचड़ और पानी को साफ किए बिना ही सीधे उसके ऊपर गर्म तारकोल डाल दिया जाता है। इस कारण डामर सड़क की सतह को पकड़ नहीं पाता और वाहनों के दबाव से तुरंत उखड़ जाता है।
  • स्थायी समाधान की कमी: अधिकारियों द्वारा सिर्फ तात्कालिक खानापूर्ति की जाती है, जबकि इस पुल को पूरी तरह से नए सिरे से मजबूत सामग्री के साथ बनाए जाने की जरूरत है।

वाहन चालकों और स्थानीय लोगों ने बयां किया अपना दर्द

इस मार्ग पर नियमित रूप से चलने वाले ऑटो चालक अंकित ने बताया कि सड़क पर इतने विशालकाय गड्ढे बन चुके हैं कि कई बार उनका ऑटो उनमें फंसकर पलटने की स्थिति में आ जाता है। उन्होंने कहा कि हर थोड़े दिन में सड़क की लीपापोती कर दी जाती है, जो दो दिन भी नहीं टिकती। यदि संबंधित विभाग एक बार ढंग से और गुणवत्तापूर्ण तरीके से सड़क का निर्माण करा दे, तो जनता को इस रोज-रोज की बड़ी परेशानी से राहत मिल सकती है।

गड्ढे में गिरकर बाल-बाल बचे बुलेट सवार लव ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि सड़क की स्थिति इतनी जर्जर है कि अचानक गाड़ी का संतुलन बिगड़ जाता है। यहां कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। अगर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इन गड्ढों के कारण किसी मासूम को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

20 से 25 साल पुराना है ओवरब्रिज, भारी वाहनों का रहता है भारी दबाव

यह रेलवे ओवरब्रिज लगभग 20 से 25 साल पुराना हो चुका है। पुराना ढांचा होने के बावजूद इस मार्ग पर भारी व्यावसायिक वाहनों, जैसे डंपर और बड़े ट्रकों का चौबीसों घंटे अत्यधिक दबाव रहता है। भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही के कारण सड़क पर बने गड्ढे और अधिक चौड़े व गहरे होते जा रहे हैं। कई बार इन गड्ढों में फंसकर ऑटो रिक्शा भी पलट जाते हैं। इस पुल के नीचे पीपल के पेड़ के पास भी लंबे समय से एक बड़ा गड्ढा बना हुआ है, जिसमें हमेशा गंदा पानी जमा रहता है और राहगीर उसमें गिरकर चोटिल होते रहते हैं।

बल्लभगढ़ से नंगला तक पूरी टोल रोड भी खस्ताहाल

स्थानीय निवासी राधे ने बताया कि सिर्फ यह रेलवे पुल ही नहीं, बल्कि बल्लभगढ़ से नंगला तक जाने वाली पूरी टोल रोड की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों ने इस मुख्य मार्ग को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। लाखों लोगों की आवाजाही का मुख्य जरिया होने के बावजूद इस सड़क के सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोग टोल टैक्स देने के बाद भी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।

बारिश में बढ़ जाती है आफत, मिनटों का सफर घंटों में हो रहा पूरा

एक अन्य ऑटो चालक अभिषेक ने बताया कि मानसून के समय यहां स्थिति नारकीय हो जाती है। जब पूरी सड़क पर पानी जमा हो जाता है, तब वाहन निकालना किसी जंग जीतने जैसा होता है। गड्ढे छिपे होने के कारण रोजाना गाड़ियां आपस में टकराती हैं या पलट जाती हैं। इन गड्ढों की वजह से वाहनों की रफ्तार थम जाती है, जिससे सुबह और शाम के समय यहां मीलों लंबा भीषण जाम लग जाता है। जिस दूरी को पार करने में महज कुछ मिनट लगने चाहिए, उसे तय करने में अब लोगों को एक-एक घंटे से अधिक का समय लग रहा है। जब तक प्रशासन इस समस्या का कोई पक्का और टिकाऊ समाधान नहीं करता, तब तक लोगों की यह मुसीबत कम होने वाली नहीं है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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