व्हाट्सएप पर लहूलुहान पति की तस्वीर देख कांप गई पत्नी, जंतर-मंतर हिंसा में घायल SI की आपबीती भारत एक घंटा पहले 5
जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान हमले में घायल हुए सब-इंस्पेक्टर अशोक मीणा की पत्नी ने अपने परिवार की चिंता और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल उठाए हैं।

सब-इंस्पेक्टर की पत्नी ने बयां किया खौफनाक मंजर

नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ में तैनात सब-इंस्पेक्टर अशोक मीणा जंतर-मंतर पर कानून व्यवस्था संभालने के लिए तैनात किए गए थे। उनकी पत्नी नीरज मीणा ने एक भावुक बातचीत में बताया कि उन्हें उस समय गहरा सदमा लगा, जब उन्होंने व्हाट्सएप पर अपने पति की खून से लथपथ तस्वीर देखी। नीरज एक गृहिणी हैं और उनके साथ एक बेटा जो 9वीं कक्षा में है और एक बेटी जो 6वीं कक्षा में पढ़ती है, उनके परिवार का हिस्सा हैं।

सुबह की विदाई और दोपहर का वह डरावना मैसेज

नीरज मीणा ने बताया कि 20 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे अशोक मीणा ड्यूटी के लिए घर से निकले थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन सुबह करीब 11 बजे उन्हें पता चला कि उनके पति घायल हो गए हैं। कुछ ही देर बाद जब उन्होंने व्हाट्सएप चेक किया, तो स्क्रीन पर पति की घायल और लहूलुहान अवस्था की फोटो देखकर वह सन्न रह गईं। जब दोपहर के वक्त उनकी अशोक मीणा से बात हुई, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने मरहम-पट्टी करवा ली है और वे वापस अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गए हैं।

पुलिसकर्मियों के परिवार पर क्या बीतती है

नीरज ने सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिसकर्मी केवल अपनी वर्दी की जिम्मेदारी नहीं निभाते, उनके पीछे पूरा परिवार उनके सकुशल लौटने की राह देखता है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, जिनकी सलामती के लिए घर में पत्नी और बच्चे प्रार्थना करते हैं। यदि ड्यूटी के वक्त किसी पुलिसकर्मी के साथ कोई बड़ी अनहोनी हो जाए, तो उसके परिवार का ख्याल कौन रखेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस हर मौसम और मुश्किल परिस्थितियों में सबसे आगे रहकर व्यवस्था संभालती है। उन्होंने घटनाक्रम को याद करते हुए बताया कि जिस वक्त यह हमला हुआ, अशोक मीणा संसद की ओर बढ़ने वाली भीड़ को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी पीछे से किसी ने उनके सिर पर पत्थर दे मारा। इतनी गंभीर चोट के बाद भी वे दोबारा काम पर लौट गए।

हिंसा की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग

नीरज मीणा ने इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी था और सब कुछ शांतिपूर्वक चल रहा था। उन्होंने आशंका जताई कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ उपद्रवी तत्व शामिल हो गए होंगे जिन्होंने पुलिस को निशाना बनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना छात्रों का अधिकार हो सकता है, लेकिन पत्थर और लाठियों का सहारा लेना किसी भी स्थिति में छात्रों का तरीका नहीं है। दोषी लोगों की पहचान होनी चाहिए और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिसकर्मियों के मानवाधिकारों पर प्रशासन से अपील

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के भी अपने मानवाधिकार होते हैं और उन्हें हिंसा का निशाना बनने से रोकने के लिए प्रभावी सिस्टम की जरूरत है। उन्होंने चेताया कि यदि रक्षकों को ही लगातार निशाना बनाया जाएगा, तो भविष्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो जाएगा। पुलिस की सुरक्षा और उनके परिवारों की मानसिक स्थिति को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। इधर, आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोहों के चलते दिल्ली पुलिस ने राजधानी की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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