कानपुर के UPTTI में तैयार हो रही स्मार्ट सैन्य वर्दी: बर्फ में दबे जवानों को पलक झपकते ही खोज निकालेगी यह तकनीक उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 6
उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित UPTTI एक ऐसी हाईटेक वर्दी विकसित कर रहा है, जो बर्फीले इलाकों में हिमस्खलन के दौरान लापता हुए सैनिकों की सटीक लोकेशन ट्रैक कर सकेगी। इस नवाचार से भविष्य में रेस्क्यू ऑपरेशन पहले से अधिक तेज और प्रभावी हो जाएंगे।

सैनिकों की सुरक्षा के लिए कानपुर में हाईटेक पहल

देश की सीमाओं की सुरक्षा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात हमारे सैनिकों के लिए कानपुर से एक बड़ी उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान यानी UPTTI ने एक अत्याधुनिक स्मार्ट सैन्य वर्दी विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह वर्दी न केवल सामान्य कपड़े की तरह होगी, बल्कि विषम परिस्थितियों जैसे कि बर्फीले इलाकों में यह जवानों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगी। यदि कोई सैनिक बर्फबारी या हिमस्खलन की चपेट में आकर लापता हो जाता है, तो यह स्मार्ट वर्दी लगातार सिग्नल भेजकर रेस्क्यू टीम को उसकी सटीक स्थिति की जानकारी देगी।

कपड़े के धागों में छिपी है तकनीक

इस अनूठी परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए UPTTI के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मुकेश सिंह ने बताया कि यह भारत में अपनी तरह की पहली ऐसी पहल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अलग से कोई सेंसर या चिप चिपकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय, तकनीक को बुनाई के दौरान ही फैब्रिक के भीतर समाहित कर दिया जाएगा। देखने में यह वर्दी एक सामान्य कपड़े की तरह ही महसूस होगी, लेकिन इसके अंदर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तंत्र पूरी तरह से सक्रिय रहेगा।

कैसे काम करेगा यह ट्रैकिंग सिस्टम

इस स्मार्ट वर्दी की कार्यप्रणाली काफी उन्नत होगी। इसमें जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के अलावा विशेष कंडक्टिव इंक, माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक चिप और एंटीना का उपयोग किया जाएगा। ये तमाम सिस्टम मिलकर सैनिक की लोकेशन का सटीक डेटा कंट्रोल रूम तक पहुंचाएंगे। यह तकनीक विशेष रूप से बर्फीले और पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात उन सैनिकों के लिए एक जीवन रक्षक साबित हो सकती है, जो प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आने पर तुरंत ट्रैक नहीं किए जा पाते। इस प्रोजेक्ट पर UPTTI के शोधार्थी, फैकल्टी के सदस्य और रक्षा अनुसंधान संस्था डीएमएसआरडीई के विशेषज्ञ मिलकर काम कर रहे हैं। संस्थान का लक्ष्य है कि अगले दो साल के भीतर इस स्मार्ट वर्दी का पहला कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार कर लिया जाए।

स्वास्थ्य निगरानी में भी मिलेगी मदद

प्रोफेसर मुकेश सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि फिलहाल इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लोकेशन ट्रैकिंग पर केंद्रित है, लेकिन भविष्य में इसके दायरे को और बढ़ाया जाएगा। आने वाले समय में इस स्मार्ट वर्दी में ऐसे फीचर जोड़े जाएंगे जो सैनिक के शारीरिक स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखेंगे। इसमें हृदय गति, शरीर का तापमान और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग शामिल होगी। यह जानकारी सीधे बेस कैंप तक पहुंचेगी, जिससे घायल या बीमार सैनिक को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।

धुलाई का भी नहीं होगा असर

स्मार्ट कपड़ों की सबसे बड़ी चुनौती उन्हें सुरक्षित और टिकाऊ बनाए रखने की होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कंडक्टिव इंक से तैयार किए गए इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को इस तरह से सुरक्षित किया जा रहा है कि उन पर बार-बार धुलाई, लंबे समय तक इस्तेमाल या खराब मौसम की मार का कोई नकारात्मक असर न पड़े। यह पूरी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली वर्दी के भीतर सुरक्षित रहेगी, जिससे सैनिकों को इसे पहनने में कोई असुविधा नहीं होगी। यदि यह शोध सफल रहा, तो भारतीय सेना के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी, जो कठिन से कठिन इलाकों में तैनात जवानों के बचाव अभियान को तेज और सुरक्षित बनाने में गेम चेंजर साबित हो सकती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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