फरीदाबाद: शिव नगर और मुजेसर में 700 परिवारों पर बेघर होने का संकट, नोटिस मिलते ही पसरा मातम हरियाणा 2 घंटे पहले 3
फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर और मुजेसर में सीपीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने 700 घरों को खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट के आदेश के बाद 26 जुलाई से शुरू होने वाली कार्रवाई से सैकड़ों गरीब परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।

गड्ढों और नालियों के बीच से खड़ा किया आशियाना

फरीदाबाद का सेक्टर-22 इलाका, जिसे आज शिव नगर और मुजेसर के नाम से जाना जाता है, कभी किसी के लिए रहने लायक जगह नहीं थी। स्थानीय निवासी याद करते हैं कि दशकों पहले यहां चारों तरफ गहरे गड्ढे हुआ करते थे, जिनमें हर समय नालियों का गंदा पानी भरा रहता था। आसपास की कंपनियों की राख यहां गिराई जाती थी, जिससे यह इलाका एक नरक की तरह था। उस दौर में यहां कदम रखना भी दूभर था, लेकिन जिन गरीब परिवारों के पास सिर छुपाने के लिए कोई छत नहीं थी, उन्होंने इसी बदहाल जमीन को अपना आधार बनाया। किसी ने कीचड़ और नाले के पानी के बीच अपनी झुग्गी खड़ी की, तो किसी ने अपनी मेहनत से मिट्टी ढोकर इस जमीन को समतल किया। मजदूरी से बचाए गए एक-एक पैसे को जोड़कर, दिन-रात की मेहनत और ईंट-ईंट जोड़कर उन्होंने अपने छोटे-छोटे पक्के मकान खड़े किए। आज ये लोग कहते हैं कि उन्होंने अपने खून-पसीने से इस वीरान और नरक जैसी जगह को रहने लायक बनाया है।

सालों की जमा-पूंजी और सपनों का आशियाना

जैसे-जैसे वक्त बीता, इस जमीन पर बस्तियां बस गईं, गलियां बन गईं और परिवारों के बच्चे बड़े होने लगे। लोगों ने अपने घरों को संवारा और वहां बुनियादी सुविधाएं जुटाईं। हालांकि, अब जब सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है, तब प्रशासन की तरफ से जारी नोटिस ने इन सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। जैसे तिनका-तिनका जोड़कर बनाया गया आशियाना अचानक बिखरने वाला हो, वैसा ही डर आज शिव नगर और मुजेसर के लोगों के मन में घर कर गया है। हर घर में सन्नाटा पसरा है और लोगों की आंखों में भविष्य को लेकर गहरे आंसू हैं। गरीब परिवारों के लिए यह केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी की कमाई है।

600 से 700 परिवारों के सिर से छिन सकती है छत

फरीदाबाद के सेक्टर-22 में सीपीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने इन मकानों को खाली करने का अल्टीमेटम मिलने के बाद से लगभग 600 से 700 परिवार अत्यधिक तनाव में हैं। इन लोगों के हाथों में बीपीएल कार्ड तो हैं, जो इनकी आर्थिक स्थिति का प्रमाण देते हैं, लेकिन प्रशासन के नोटिस ने उनके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि वे आखिर जाएं तो जाएं कहां। यहां रहने वाले अधिकतर लोग बिहार और उत्तर प्रदेश से आए प्रवासी मजदूर हैं, जिन्होंने बरसों तक मजदूरी, सफाई का काम या दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा करके अपने परिवार का पालन-पोषण किया है। अब उनके पास अपना आशियाना बचाने के लिए सिर्फ सरकार से गुहार लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

सीपीडब्ल्यूडी की जमीन और कानूनी कार्रवाई

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के अभियंता सुरेश कुमार के अनुसार, मुजेसर, सारन और सेक्टर-22 में फैली लगभग 6 एकड़ जमीन गर्वमेंट प्रेस की है। करीब 25 साल पहले गर्वमेंट प्रेस के बंद होने के बाद यह पूरी जमीन सीपीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर दी गई थी। विभाग का स्पष्ट कहना है कि इस जमीन पर किया गया कब्जा पूरी तरह अवैध है। इससे पहले भी विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी किए गए थे और यह मामला कानूनी लड़ाई तक भी पहुंचा था। अब न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए विभाग जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने की तैयारी कर रहा है। एसडीएम त्रिलोकचंद ने जानकारी दी कि नियमानुसार सभी निवासियों को विधिवत नोटिस दिए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 26 जुलाई के बाद प्रशासन द्वारा तोड़ने की कार्रवाई शुरू की जाएगी और लोगों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने घर खाली कर दें।

बुजुर्गों और महिलाओं का दर्द

शिव नगर में रहने वाली 65 वर्षीय सरोज का कहना है कि वे पिछले 30 सालों से यहां रह रही हैं। प्रशासन की ओर से नोटिस थमाया गया है, जिसमें 26 जुलाई तक मकान खाली करने का सख्त आदेश है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा है कि उसके बाद यदि सामान का नुकसान होता है, तो प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा। सरोज अपने बीपीएल कार्ड को दिखाते हुए भावुक स्वर में कहती हैं कि सरकार गरीबों की मदद की बात करती है, लेकिन आज उन्हें ही बेघर किया जा रहा है। इसी प्रकार, 25 साल से यहां रह रही लीलावती ने बताया कि उन्होंने उस समय 15 हजार रुपये देकर 30 गज जमीन खरीदी थी और धीरे-धीरे करीब ढाई लाख रुपये खर्च करके अपना मकान तैयार किया। उस दौर में वहां न तो बिजली थी और न ही पानी, लोग कंपनियों से पानी लाते थे।

संघर्ष की दास्तान

राजकुमारी (56 वर्ष) का दर्द भी कुछ कम नहीं है। उन्होंने 25 साल पहले 20 हजार रुपये में 30 गज जमीन ली थी और लगभग चार से पांच लाख रुपये की बचत से घर खड़ा किया था। पति के निधन के बाद अब वे अपनी बेटी के साथ इस घर में रहती हैं। नोटिस ने उनके सामने जीवन का सबसे बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इसी तरह 60 वर्षीय मलखान सिंह, जो यहां करीब 26 वर्षों से रह रहे हैं, बताते हैं कि उन्होंने 15 हजार रुपये में 35 गज जमीन ली थी और बाद में चार से पांच लाख रुपये लगाकर मकान बनाया। वे कहते हैं कि यहां रहने वाला हर व्यक्ति मेहनतकश है, किसी ने कोई गलत काम नहीं किया, सिर्फ अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक सुरक्षित छत बनाई थी। अब 26 जुलाई की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। बुलडोजर चलने के डर से हर परिवार अपने आशियाने को बचाने की आखिरी कोशिश में जुटा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!