हरियाणा
एक घंटा पहले
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विचारों
दिल्ली से सटे फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में इन दिनों हर सुबह डर और बेचैनी लेकर आ रही है। तंग गलियों में बसे हजारों परिवारों की रातों की नींद उड़ी हुई है। हर किसी के मन में एक ही आशंका है कि कहीं अगली बार बुलडोजर उनके मकान की तरफ न मुड़ जाए। नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ छेड़े गए अभियान के तहत अब तक 300 से अधिक छोटे-बड़े निर्माण जमींदोज किए जा चुके हैं।
कार्रवाई अभी थमी नहीं है और कॉलोनी में बचे हुए मकानों पर भी बुलडोजर चलने की आशंका जताई जा रही है। इसी डर के बीच स्थानीय लोग लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने आशियानों को बचाने की गुहार लगा रहे हैं। करीब 10 हजार मकानों वाली इस कॉलोनी की हर गली और हर चौक पर बस एक ही चर्चा है—क्या उनका घर बच पाएगा या नहीं। कई लोग अपना कामकाज छोड़कर कॉलोनी में ही डटे हुए हैं। किसी को नौकरी छिन जाने की फिक्र है तो किसी को परिवार के सिर से छत हटने का डर सता रहा है।
'नौकरी करूं या घर बचाऊं'
कॉलोनी के निवासी संदीप बताते हैं कि वे साल 1995 से यहां रह रहे हैं और उनसे पहले उनके पिता भी इसी कॉलोनी में रहते थे। उनके मुताबिक यह बहुत पुरानी बस्ती है, जिसका आगे का हिस्सा पूरी तरह तोड़ा जा चुका है। पहले मस्जिद गिराई गई और अब बाकी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। संदीप कहते हैं कि अभी तक उनके मकान पर कोई नोटिस नहीं चस्पा किया गया है। वे सैलून का काम करते हैं, लेकिन इन दिनों दुकान जाने के बजाय घर के बाहर ही खड़े रहते हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि वे काम पर जाएं या अपने घर की रखवाली करें।
किराए पर भी नहीं मिल रहा कमरा
कॉलोनी के एक और निवासी संदीप भी इसी उलझन में फंसे हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले दो दिनों से ड्यूटी छोड़कर यहीं खड़े हैं और तय नहीं कर पा रहे कि नौकरी करें या घर बचाएं। किराए पर कमरा तलाशने गए तो उन्हें 15 हजार रुपए महीना किराया बताया गया, जबकि उनकी आमदनी इतनी नहीं कि वे इतना महंगा किराया चुका सकें। उनका कहना है कि कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि नेहरू कॉलोनी के रहने वालों को किराए पर कमरा ही नहीं दिया जाएगा।
पांच दिन में घर खाली करने का नोटिस
कॉलोनी के तीन नंबर इलाके में रहने वाले राजेश प्रजापति, जो एलआईसी एडवाइजर हैं, बताते हैं कि उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिल चुका है। उनसे पांच दिन के भीतर घर खाली करने को कहा गया है और चेतावनी दी गई है कि ऐसा न करने पर बुलडोजर से मकान तोड़ दिया जाएगा। राजेश का कहना है कि उन्हें रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं दी गई है, साथ ही उनके यहां पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी बंद कर दी गई हैं। छोटे-छोटे बच्चे परेशान हैं और परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
'पहले रहने का इंतजाम तो हो'
स्थानीय लोगों के अनुसार नेहरू कॉलोनी में करीब एक लाख लोग रहते हैं और यहां लगभग 10 हजार मकान हैं। उनकी मांग है कि अगर प्रशासन कार्रवाई करना ही चाहता है तो पहले उन्हें रहने का कोई वैकल्पिक इंतजाम मुहैया कराया जाए। लोगों का कहना है कि इस तरह अचानक नोटिस थमाकर कार्रवाई की जाएगी तो आखिर वे जाएंगे कहां।
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