गुटखा विज्ञापन विवाद: अजय देवगन ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, शाहरुख और टाइगर ने भी दिया जवाब मनोरंजन एक घंटा पहले 6
बॉलीवुड के तीन बड़े सितारों पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन का शिकंजा कस गया है। अजय देवगन ने इस कानूनी नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जबकि शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ ने भी अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं।

अजय देवगन ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अजय देवगन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी FDA द्वारा भेजे गए नोटिस को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। दरअसल, एक गुटखा और इलायची ब्रांड के प्रचार को लेकर जारी इस नोटिस के खिलाफ अभिनेता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। विज्ञापन जगत और कानूनी गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इस मामले में केवल अजय देवगन ही नहीं, बल्कि फिल्म जगत के दो अन्य बड़े नाम भी शामिल हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, अभिनेता का यह कदम स्पष्ट करता है कि वे इस नियामक कार्रवाई को न्यायिक स्तर पर लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, याचिका में किन विशिष्ट बिंदुओं को आधार बनाया गया है और अदालत से उन्होंने किस प्रकार की राहत की मांग की है, इसकी अधिकृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

शाहरुख और टाइगर ने भी दिया जवाब

इस पूरे मामले में केवल अजय देवगन ही नहीं, बल्कि शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी महाराष्ट्र FDA ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नियामक ने इन तीनों कलाकारों से इस बात का जवाब तलब किया था कि वे उस विज्ञापन का हिस्सा क्यों बने और उनके विरुद्ध खाद्य सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन के लिए दंडात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। खबर है कि तीनों अभिनेताओं ने तय समय सीमा के भीतर अपने-अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं। महाराष्ट्र FDA के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस बात की पुष्टि की है कि जवाब मिलने के साथ-साथ दो अभिनेताओं ने व्यक्तिगत सुनवाई का भी अनुरोध किया था, जिसकी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। फिलहाल इन जवाबों के भीतर छिपी दलीलों को गोपनीय रखा गया है।

क्यों शुरू हुआ यह विवाद?

पूरे विवाद की जड़ एक विज्ञापन अभियान है जिसमें इलायची ब्रांड को प्रमोट किया जा रहा है। महाराष्ट्र में गुटखा उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। FDA को इस बात का संदेह है कि इलायची के नाम पर वास्तव में प्रतिबंधित गुटखा उत्पाद का ही प्रचार किया जा रहा है। मीडिया और नियामकीय शब्दावली में इसे सरोगेट विज्ञापन कहा जाता है, जहां किसी प्रतिबंधित वस्तु को प्रमोट करने के लिए दूसरे उत्पाद का सहारा लिया जाता है। प्रशासन का तर्क है कि इस तरह के विज्ञापनों से ग्राहकों के मन में प्रतिबंधित ब्रांड की पहचान बनी रहती है, जो कि जनहित और स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंताजनक है।

खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में सितारे

महाराष्ट्र FDA ने अपनी कार्रवाई का आधार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 को बनाया है। इस अधिनियम के तहत भ्रामक विज्ञापनों और प्रचार की जवाबदेही से संबंधित सख्त प्रावधान मौजूद हैं। नियामक ने अपनी नोटिस में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि ये सितारे इस विज्ञापन अभियान में अपनी भागीदारी तुरंत प्रभाव से बंद करें। साथ ही, इन अभिनेताओं को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस ब्रांड से जुड़ी सभी प्रचार सामग्रियों को हटाने के निर्देश भी दिए गए थे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या इन बड़े सितारों के विज्ञापनों पर अंतिम रूप से रोक लगती है या नहीं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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