पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर भारतीय युवाओं को बिगाड़ने का खेल: शहजाद भट्टी का काला सच राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मोहरे शहजाद भट्टी का नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए कैसे भारतीय युवाओं को आतंकी गतिविधियों में झोंक रहा था, इसका खुलासा तीन ऐसे युवाओं ने किया है जो खुद इसके चंगुल में फंस गए थे।

सोशल मीडिया के जरिए रची जा रही साजिश

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का एक खूंखार मोहरा शहजाद भट्टी इन दिनों भारतीय युवाओं को अपना निशाना बना रहा है। हाल ही में भारत सरकार ने उसके खिलाफ यूएपीए के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे आतंकवादी घोषित किया है। शहजाद भट्टी का मुख्य काम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करके भारतीय युवाओं को बरगलाना और उन्हें देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल करना है। न्यूज18 इंडिया ने एक विशेष जांच की है, जिसमें तीन अलग-अलग राज्यों के युवाओं ने अपनी आपबीती सुनाई है कि कैसे वे इस खतरनाक जाल में फंसे थे। समय रहते भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल इनकी पहचान की, बल्कि इन्हें सही राह पर लाकर मुख्यधारा में वापस जोड़ने का सराहनीय काम भी किया है।

काम करने का तरीका और प्रलोभन

शहजाद भट्टी की कार्यप्रणाली बेहद चालाकी भरी है। वह इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों से युवाओं को संपर्क करता है। पहले वह पैसे का लालच देता है, फिर हर तरह के सहयोग का वादा करता है और अंत में हथियार उपलब्ध कराने का झांसा देकर उन्हें आतंकी घटनाओं के लिए तैयार करता है। इन साजिशों में बड़े स्तर पर टारगेट किलिंग, ग्रेनेड फेंकने और दीवारों पर भारत-विरोधी नारे लिखवाना जैसे कृत्य शामिल होते हैं। जिन तीन युवाओं से हमने बात की, उनमें से एक यूपीएससी एस्पिरेंट है, एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है जिसके तीन लाख फॉलोअर्स थे, और तीसरा एक सामान्य काम करने वाला युवक है जो अब खेती करता है।

यूपीएससी एस्पिरेंट का अनुभव: रील और लॉरेंस बिश्नोई का नाम

एक युवा, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहा है और कानून की पढ़ाई भी कर रहा है, ने बताया कि अक्टूबर के महीने में व्यक्तिगत समस्याओं के चलते वह सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हो गया था। उसे एक रील दिखी जिसमें लॉरेंस बिश्नोई और शहजाद भट्टी का जिक्र था। रील को लाइक करने के बाद वह धीरे-धीरे ऐसे गिरोह के संपर्क में आने लगा। उसे पता भी नहीं चला कि वह पाकिस्तानी डॉन का समर्थन कर रहा है। धीरे-धीरे उसे सोहेल नाम के एक व्यक्ति से जोड़ दिया गया जो दुबई से पाकिस्तानी शहजाद भट्टी का प्रचार करता था। हालांकि यह युवा पढ़ाई के प्रति गंभीर था और उसने समझदारी दिखाते हुए टास्क लेने से इनकार कर दिया, लेकिन उसे हरमन और धीरू जैसे लड़कों का पता चला जो इसी नेटवर्क का शिकार होकर ग्रेनेड फेंकने जैसे गंभीर अपराधों में शामिल हो गए।

टारगेट किलिंग और पैसे का जाल

दूसरे युवा, जो दिल्ली-एनसीआर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर था, ने खुलासा किया कि उसके पास शहजाद भट्टी का सीधा मैसेज आया था। उसे किसी हिंदू रक्षा दल के सदस्य को मारने का काम सौंपा गया था। जब उसने इनकार किया, तो भट्टी ने उसे उस व्यक्ति का पता बताने को कहा ताकि वह नेपाल के जरिए अपने गुर्गे भेज सके। उसे लाखों रुपये और नकली पासपोर्ट का लालच दिया गया था। बाद में भारतीय एजेंसियों ने उसे अपनी कस्टडी में लिया और उसकी काउंसलिंग की। अब वह एक मस्जिद में सेवा कर रहा है और नफरत भरी वीडियो बनाना पूरी तरह बंद कर चुका है।

पठानकोट का खौफनाक सफर

तीसरे युवा ने अपनी कहानी सुनाते हुए बताया कि उसे भी टास्क पूरा करने के लिए पठानकोट बुलाया गया था। वहां उसे एक होटल में रुकवाया गया और बताया गया कि उसे किसी की हत्या करनी है। जब उसे एहसास हुआ कि वह एक आतंकवादी नेटवर्क के चंगुल में फंस चुका है, तो उसने बहाने से वहां से निकलने का फैसला किया। भट्टी ने उसे मर्डर करने के बदले तीन करोड़ रुपये का सपना दिखाया था। वह व्यक्ति आज खेती करता है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का शुक्रगुजार है कि उन्होंने उसे सही वक्त पर बचा लिया।

सुरक्षा एजेंसियों का एक्शन और संदेश

देश की अलग-अलग राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस मॉड्यूल के खिलाफ सक्रिय हैं। इन युवाओं के माध्यम से यह साफ हो गया है कि टीटीएच जैसे शब्दों का अर्थ तहरीक तालिबान हिंदुस्तान है, जिसका इस्तेमाल ग्रेफिटी के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के लिए किया जाता है। भट्टी का मकसद नाबालिग बच्चों को फंसाना है क्योंकि उन पर कानूनी कार्रवाई कम सख्त होती है। ये युवा आज देश के दूसरे युवाओं को सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं कि वे सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर अपना और अपने परिवार का भविष्य बर्बाद न करें।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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