पश्चिम बंगाल
2 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की विशेष मांग
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आयोग ने एक हलफनामा दाखिल करते हुए मांग की है कि राज्य की प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए एक अलग ट्रिब्यूनल बनाया जाए। चुनाव आयोग का तर्क है कि SIR प्रक्रिया के बाद राज्य में बड़ी संख्या में आपत्तियां और अपीलें लंबित पड़ी हैं। इन मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा प्रशासनिक ढांचे के अलावा अतिरिक्त ट्रिब्यूनल का गठन करना बेहद जरूरी हो गया है।
लंबित अपीलों का विस्तृत ब्यौरा
चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक कुल 38.3 लाख SIR अपीलें दर्ज की जा चुकी हैं। आयोग ने बताया कि 10 सितंबर तक की स्थिति के मुताबिक, कुल लंबित अपीलों में से केवल 1.26 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है। संतोषजनक बात यह है कि जिन अपीलों पर फैसला लिया गया, उनमें से 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कर लिए गए हैं। आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि जिन मामलों पर सुनवाई पूरी हुई है, उनमें 90 फीसदी से अधिक अपीलें नाम बहाल करने के पक्ष में रही हैं।
आयोग के पास मौजूद 24 जिलों के डेटा के अनुसार, इन अपीलों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
- 22.2 लाख अपीलें उन नागरिकों द्वारा दायर की गई हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
- 16.1 लाख अपीलें ऐसी हैं जिनमें आपत्ति जताते हुए उन नामों को सूची से हटाने की मांग की गई है, जिन्हें अपीलकर्ताओं ने गलत तरीके से जोड़ा गया बताया है।
नाम हटाने की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण
मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपना रुख साफ किया है। आयोग का कहना है कि सिर्फ हटाए गए नामों की कुल संख्या देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि हटाई गई सूचियों में ऐसे व्यक्तियों के नाम भी शामिल थे जो या तो दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, मृत हो चुके हैं, या फिर वे डुप्लीकेट मतदाता थे।
चुनाव परिणामों पर असर के दावों का खंडन
चुनाव आयोग ने उन सभी दावों को सिरे से नकार दिया है जिनमें कहा गया था कि SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या का सीधा असर लोकसभा चुनाव के नतीजों पर पड़ा। आयोग ने विपक्षी दावों को आधारहीन बताते हुए कहा कि ये तर्क गलत अनुमानों पर आधारित हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि हालांकि कुछ सीटों पर हटाए गए नामों और जीत के अंतर के आंकड़े निकट प्रतीत होते हैं, लेकिन इसे सीधे तौर पर चुनाव परिणाम प्रभावित करने का कारण नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वे पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की अपीलों के निपटारे की पूरी जानकारी पेश करें।
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