यूजीसी नेट परीक्षा रद्द होने से छात्र आक्रोश में, एनटीए के फैसले पर उठे सवाल करियर 3 घंटे पहले 2
यूजीसी नेट की परीक्षा रद्द होने के बाद परीक्षार्थी खासे परेशान हैं। छात्रों ने एनटीए कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित करने के फैसले का कड़ा विरोध जताया है।

परीक्षा रद्द होने से परीक्षार्थियों में असंतोष

यूजीसी नेट की तीन विषयों की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद से ही स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, बल्कि उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं। इसे लेकर दिल्ली में स्थित एनटीए कार्यालय के बाहर छात्रों और शिक्षकों का एक बड़ा समूह एकत्र हुआ और अपनी नाराजगी जाहिर की।

री-एग्जाम की मांग का विरोध

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुख्य तर्क है कि एनटीए की तकनीकी खामियों या प्रबंधन की गलतियों की सजा परीक्षार्थियों को क्यों भुगतनी चाहिए? छात्र और शिक्षक मुख्य रूप से इंग्लिश और कॉमर्स विषयों के लिए दोबारा परीक्षा कराए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इन विषयों में बिना किसी ठोस कारण के दोबारा परीक्षा आयोजित करना समय और मेहनत की बर्बादी है।

आंसर की और वित्तीय बोझ को लेकर चिंता

पॉलिटिकल साइंस के पेपर को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। छात्रों का कहना है कि विषय की आंसर की में 14-15 सवालों को लेकर भारी त्रुटियां हैं। इन सवालों को चुनौती देने के लिए छात्रों को आर्थिक भार उठाना पड़ सकता है। छात्रों के अनुसार, अगर उन्हें इतने बड़े पैमाने पर सवालों को चैलेंज करना पड़ता है, तो प्रति छात्र लगभग 3,000 रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जो कई अभ्यर्थियों के लिए वहन करना कठिन है।

परीक्षाओं के टकराने का डर

एक तरफ जहां दोबारा परीक्षा का तनाव है, वहीं दूसरी तरफ उम्मीदवारों को अपनी भविष्य की तैयारी को लेकर भी डर सता रहा है। कई छात्रों को यह आशंका है कि अगर एनटीए दोबारा परीक्षा की कोई नई तारीख तय करता है, तो वह संभवतः उनकी अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ टकरा सकती है। इससे उनका पूरा एकेडमिक कैलेंडर बिगड़ सकता है और वे अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में बैठने से वंचित रह सकते हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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