गुरु रहमान की मुफ्त कोचिंग से बदली किस्मत: बिहार को मिली पहली ट्रांसजेंडर दारोगा, 17 बने सिपाही, रहना-खाना सब मुफ्त करियर एक घंटा पहले 3
पटना के शिक्षक गुरु रहमान की निशुल्क कोचिंग और हॉस्टल की मदद से 17 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी बिहार पुलिस में सिपाही बने हैं, जबकि मानवी मधु कश्यप राज्य की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा बनीं।

समाज जिन्हें अक्सर सिर्फ तालियां बजाने, बधाई मांगने और हाशिये पर जीवन बिताने तक सीमित मान लेता है, उनमें से कई आज बिहार पुलिस की वर्दी पहनकर एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। इस बदलाव की नींव रखने वाले हैं पटना के शिक्षक गुरु रहमान, जिन्होंने उस दौर में ट्रांसजेंडर युवाओं का हाथ थामा, जब कई बड़े कोचिंग संस्थानों ने यह कहकर उन्हें दाखिला देने से इनकार कर दिया था कि उनके आने से कक्षा का माहौल बिगड़ जाएगा।

गुरु रहमान ने इन युवाओं को महज छात्र नहीं, बल्कि अपनी बेटियों की तरह अपनाया। उन्होंने मुफ्त पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने की व्यवस्था की और भरोसा दिलाया कि एक दिन वे भी वर्दी जरूर पहनेंगी। उनकी इसी कोशिश का परिणाम है कि आज कई ट्रांसजेंडर युवा बिहार पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें एक ऐसी छात्रा भी हैं, जिन्हें बिहार की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा होने का गौरव हासिल हुआ। हाल ही में घोषित बिहार पुलिस सिपाही के नतीजों में सफल हुए सभी 17 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी गुरु रहमान के ही विद्यार्थी हैं।

जब दूसरे संस्थानों ने पढ़ाने से कर दिया था इनकार

गुरु रहमान बताते हैं कि इस सफर की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। एक दिन जब वे अपने संस्थान में सामान्य रूप से पढ़ा रहे थे, तभी अनुप्रिया नाम की एक ट्रांसवूमेन उनसे मिलने पहुंचीं। उनके अनुसार, शुरुआत में वे उन्हें पहचान नहीं पाए, लेकिन बातचीत के दौरान अनुप्रिया ने अपनी पूरी कहानी साझा की। उन्होंने यह इच्छा जताई कि उनके समुदाय के लोग भी पढ़-लिखकर सम्मानजनक जीवन जिएं।

उसी समय बिहार पुलिस भर्ती में ट्रांसजेंडर समुदाय को एक प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था बनी थी, जिससे इस समुदाय के युवाओं में नई उम्मीद जागी। कुछ समय बाद रेखा नाम की एक अभ्यर्थी गुरु रहमान के पास पहुंचीं। उन्होंने पढ़ाई की और नौकरी हासिल कर ली। इसके बाद धीरे-धीरे समुदाय के दूसरे लोग भी शिक्षा की ओर कदम बढ़ाने लगे।

इसी दौरान मानवी मधु कश्यप अपने कुछ साथियों के साथ गुरु रहमान के पास आईं। उन्होंने बताया कि वे दाखिले के लिए कई बड़े कोचिंग संस्थानों में गई थीं, लेकिन हर जगह यह कहकर मना कर दिया गया कि उनकी मौजूदगी से कक्षा का माहौल खराब हो जाएगा। निराश होकर वे गुरु रहमान के पास पहुंचीं और कहा कि अब वही उनकी आखिरी उम्मीद हैं।

मेरी छात्रा बनी राज्य की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा

गुरु रहमान ने बिना किसी भेदभाव के सभी को पढ़ाना शुरू किया। वे बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय के संघर्षों को बेहद करीब से समझा और उनके दुख, सामाजिक तिरस्कार तथा पहचान की लड़ाई को महसूस किया। मेहनत रंग लाई और मानवी मधु कश्यप का चयन दारोगा के पद पर हो गया। इस तरह वे बिहार की पहली ट्रांसजेंडर दारोगा के रूप में पहचान बनाने में सफल रहीं।

गुरु रहमान कहते हैं कि मानवी की कामयाबी ने पूरे समुदाय में एक नई जागरूकता पैदा कर दी। इसके बाद बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर युवा पढ़ाई और सरकारी नौकरियों की तैयारी की ओर आकर्षित हुए। वे याद करते हैं कि उस समय उनके पास तीन ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी थे और संयोगवश तीनों का चयन हो गया। इसे वे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानते हैं।

रहने की जगह नहीं मिली तो खोल दिया हॉस्टल

केवल पढ़ाई ही नहीं, ट्रांसजेंडर युवाओं के सामने रहने की समस्या भी बड़ी चुनौती थी। गुरु रहमान बताते हैं कि अधिकांश लॉज और किराये के मकान मालिक उन्हें कमरा देने से इनकार कर देते थे, जिससे उनके लिए पढ़ाई जारी रखना और भी मुश्किल हो जाता था। इस परेशानी को देखते हुए गुरु रहमान ने खुद हॉस्टल शुरू किया और ऐलान कर दिया कि जो भी ट्रांसजेंडर छात्र-छात्राएं पढ़ना चाहती हैं, उन्हें रहने, खाने और पढ़ाई की सुविधा पूरी तरह मुफ्त दी जाएगी।

इसके बाद यह पहल एक क्रांति में बदल गई। आज कई ट्रांसजेंडर युवा बिहार पुलिस में दारोगा और सिपाही के पद पर कार्यरत हैं। गुरु रहमान बताते हैं कि हाल की सिपाही भर्ती में चयनित 17 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी उनके ही छात्र रहे हैं। वे गर्व से बताते हैं कि इनमें से कुछ को उन्होंने रेलवे स्टेशन, टोल प्लाजा और दूसरी जगहों से खोजकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा था।

गुरु रहमान का कहना है कि जब ये सभी वर्दी पहनकर समाज में सम्मान के साथ खड़े होंगे, तो उनके लिए इससे बड़ी खुशी और कोई नहीं हो सकती। फिलहाल उनकी कक्षा में 60 से 62 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी पढ़ाई कर रहे हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!