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एक घंटा पहले
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कठिन हालात भी अगर हौसले के सामने टिक नहीं पाते, तो उसकी मिसाल ओडिशा के गंजम जिले के बाकलीकोड़ा गांव के जिगर नायक हैं। तमाम आर्थिक मुश्किलों के बावजूद जिगर ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 5474 हासिल कर आईआईटी में प्रवेश का अपना सपना साकार कर लिया है। अब वह अपने गांव और परिवार के पहले आईआईटियन बनने जा रहे हैं।
पिता के जाने के बाद टूटा घर का सहारा
जिगर के पिता का कैंसर के कारण निधन हो गया था, जिसके बाद पूरा परिवार गहरे आर्थिक संकट में घिर गया। घर चलाना और बच्चे की पढ़ाई जारी रखना, दोनों ही एक साथ बड़ी चुनौती बन गए थे। ऐसे मुश्किल समय में परिवार की जिम्मेदारी मां अपूर्वा नायक के कंधों पर आ गई।
सिलाई की कमाई और गोल्ड लोन से जारी रही पढ़ाई
मां अपूर्वा नायक ने हार मानने के बजाय सिलाई का काम शुरू किया और उसी कमाई से बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाती रहीं। जरूरत पड़ने पर उन्होंने गोल्ड लोन लेकर भी बेटे की फीस का इंतजाम किया, ताकि उसकी शिक्षा में कोई रुकावट न आए। मां के इसी त्याग और भरोसे ने जिगर को आगे बढ़ने की ताकत दी।
कोटा में दो साल की कड़ी मेहनत
जिगर ने कोटा में रहकर दो साल तक लगातार कड़ी मेहनत की। उसने न सिर्फ जेईई-एडवांस्ड में सफलता पाई, बल्कि जेईई-मेन में भी शानदार प्रदर्शन किया। दिन-रात की पढ़ाई और अनुशासन ने आखिरकार उसके सपने को हकीकत में बदल दिया।
संघर्ष और शिक्षा की प्रेरणादायक मिसाल
जिगर की यह कामयाबी सिर्फ एक परीक्षा में मिली रैंक भर नहीं है, बल्कि संघर्ष, त्याग और शिक्षा की ताकत का जीता-जागता उदाहरण है। एक छोटे से गांव से निकलकर आईआईटी तक पहुंचने वाले जिगर की कहानी उन तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों में भी बड़े सपने देखते हैं।
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