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एक घंटा पहले
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भारत में डॉक्टरी को केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाजसेवा का सबसे बड़ा रास्ता और ‘भगवान के दर्जे’ जैसा सम्मान माना जाता है। यही वजह है कि हर वर्ष देश के लाखों युवा सफेद कोट पहनने का सपना लेकर मेडिकल की तैयारी में जुट जाते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में जितनी इज्जत, शोहरत और कमाई है, उतनी ही कठिन मेहनत, अटूट धैर्य और बरसों तक लगातार पढ़ाई की मांग भी है।
अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस फील्ड में कदम रखना चाहता है, तो पूरी प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। 12वीं की पढ़ाई से लेकर अस्पताल में मरीजों के इलाज तक का यह सफर कई वर्षों की मेहनत से होकर गुजरता है। आइए जानते हैं 12वीं के बाद डॉक्टर बनने का पूरा रास्ता।
तैयारी 11वीं से ही शुरू हो जाती है
डॉक्टर बनने की नींव स्कूल के दिनों में ही पड़ जाती है। इसकी पहली शर्त यह है कि 10वीं के बाद साइंस स्ट्रीम चुननी होगी, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) मुख्य विषय हों।
इसके साथ ही 12वीं की बोर्ड परीक्षा में कम से कम 50% अंक होना अनिवार्य है, जबकि आरक्षित वर्गों के लिए यह सीमा 40% से 45% रखी गई है। साथ ही आवेदक की आयु कम से कम 17 साल होनी चाहिए।
सबसे बड़ा पड़ाव: नीट परीक्षा
12वीं पास करने के बाद, या 12वीं के दौरान ही, देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) में बैठना होता है। भारत के किसी भी सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS या किसी अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला पाने का यही एकमात्र जरिया है।
इस परीक्षा में बायोलॉजी, फिजिक्स और केमिस्ट्री से ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाते हैं। इसमें जितनी बेहतर रैंक आएगी, उतने ही अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट मिलने की संभावना मजबूत होगी।
MBBS पूरा करने में कितना समय?
नीट यूजी क्रैक करने के बाद असली पढ़ाई की शुरुआत होती है। भारत में एलोपैथिक डॉक्टर बनने का प्रमुख कोर्स MBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) है, जिसे पूरा करने में कुल 5.5 साल (साढ़े पांच साल) लगते हैं। इसका विभाजन इस तरह है:
- 4.5 साल: मेडिकल कॉलेज में थ्योरी, प्रैक्टिकल, लैब और मानव शरीर की बारीकियों की पढ़ाई।
- 1 साल: इसके बाद किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में अनिवार्य रूप से रोटेटरी इंटर्नशिप, जहां असली मरीजों का इलाज करना सीखा जाता है। इस दौरान स्टाइपेंड (वेतन) भी दिया जाता है।
एलोपैथी के अलावा कौन-कौन से कोर्स?
अगर आप एलोपैथी के बजाय चिकित्सा के दूसरे क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, तो नीट के जरिए ये कोर्स भी किए जा सकते हैं:
- BDS (बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी): दांतों का डॉक्टर बनने के लिए 5 साल का कोर्स।
- BAMS (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी): आयुर्वेद डॉक्टर बनने के लिए।
- BHMS (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी): होम्योपैथी का डॉक्टर बनने के लिए।
- BYNS और BUMS: योग, प्राकृतिक चिकित्सा और यूनानी चिकित्सा से जुड़े कोर्स।
स्पेशलाइजेशन (MD/MS) का रास्ता
साढ़े पांच साल की पढ़ाई और इंटर्नशिप के बाद आप ‘जनरल फिजिशियन’ बनकर प्रैक्टिस शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको बच्चों का डॉक्टर (Pediatrician), दिल का डॉक्टर (Cardiologist) या सर्जन बनना है, तो MBBS के बाद NEET PG परीक्षा पास करनी होगी।
इसके बाद 3 साल का MD (मास्टर ऑफ मेडिसिन) या MS (मास्टर ऑफ सर्जरी) कोर्स करना होता है। फिर सुपर-स्पेशलाइजेशन (MCh/DM) के लिए 3 साल और लग सकते हैं। यानी पूरी तरह एक्सपर्ट डॉक्टर बनने में कुल 8 से 11 साल का समय लग जाता है।
डॉक्टरों को कितनी सैलरी मिलती है?
मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद करियर के कई शानदार विकल्प खुल जाते हैं। आप किसी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में ‘जूनियर रेजिडेंट’ के तौर पर काम शुरू कर सकते हैं, अपना क्लीनिक या अस्पताल खोल सकते हैं या मेडिकल रिसर्च की राह चुन सकते हैं।
एक फ्रेशर MBBS डॉक्टर की शुरुआती सैलरी 60,000 से 1,00,000 रुपये प्रति महीना तक हो सकती है। MD/MS करने और अनुभव बढ़ने के बाद यह आमदनी लाखों से करोड़ों रुपये सालाना तक पहुंच जाती है।
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