दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर को थप्पड़ मारने वाले PhD छात्र पर गिरी गाज, प्रशासन ने किया निलंबित करियर एक घंटा पहले 6
दिल्ली यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ लॉ में एक प्रोफेसर के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी छात्र को सस्पेंड कर दिया है। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद छात्र के कैंपस में घुसने पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

प्रोफेसर से मारपीट का गंभीर मामला

दिल्ली यूनिवर्सिटी परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब फैकल्टी ऑफ लॉ के एक प्रोफेसर के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इस मामले में मुख्य आरोपी शुभम सिंह है, जो कि फैकल्टी ऑफ लॉ में ही PhD का रिसर्च स्कॉलर है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी छात्र के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की है। शुभम सिंह को न केवल विश्वविद्यालय से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, बल्कि उसके दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी भी परिसर में प्रवेश करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

सुबह साढ़े 10 बजे हुई घटना

विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा सोमवार को जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, यह घटना उमंग भवन में सोमवार सुबह लगभग 10:30 बजे घटित हुई। शुभम सिंह ने इसी वर्ष यानी 2024-25 के शैक्षणिक सत्र के दौरान फेज-II प्रक्रिया के तहत फैकल्टी ऑफ लॉ में PhD कार्यक्रम में दाखिला लिया था। एक जिम्मेदार पद पर कार्यरत प्रोफेसर के साथ इस तरह का अमर्यादित व्यवहार विश्वविद्यालय की गरिमा के खिलाफ माना जा रहा है।

CCTV फुटेज में कैद हुई करतूत

प्रशासन को इस घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज प्राप्त हुई है, जिसमें स्पष्ट तौर पर आरोपी रिसर्च स्कॉलर को एक प्रोफेसर को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना सोमवार की सुबह की है और इसकी जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी का गठन किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेश स्पष्ट है कि छात्र को फैकल्टी ऑफ लॉ से निलंबित कर दिया गया है और दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट, 1922 के ऑर्डिनेंस XV-B के प्रावधानों के अंतर्गत उसे कैंपस परिसर में कहीं भी आने की अनुमति नहीं है।

तीन सदस्यीय कमेटी करेगी निष्पक्ष जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए DU प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। इस कमेटी को घटना के प्रत्येक पहलू की बारीकी से पड़ताल करने और अपनी विस्तृत रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है। समिति की कमान रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजीव गुप्ता को सौंपी गई है। उनके साथ समिति में इतिहास विभाग से विपुल सिंह और हिंदी विभाग से सुधा सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। जांच समिति द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही छात्र के भविष्य और आगे की कानूनी कार्यवाही को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षक संघ ने जताई गहरी नाराजगी

इस पूरे मामले पर दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन यानी DUTA ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। DUTA ने कुलपति योगेश सिंह को पत्र भेजकर इस घटना की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि आरोपी के विरुद्ध कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। शिक्षक संगठन का मानना है कि विश्वविद्यालय के भीतर यदि कोई शिक्षक सुरक्षित नहीं है, तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। संगठन के पदाधिकारियों ने जोर दिया कि इस प्रकार की हिंसक घटनाओं से कैंपस के माहौल पर नकारात्मक असर पड़ता है, इसलिए इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। वर्तमान में आरोपी छात्र को कैंपस से बाहर कर दिया गया है और अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में छात्र का दाखिला बरकरार रहेगा या उसे निष्कासित किया जाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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