एक-दो बार नहीं, 12 बार मिली नाकामी; 13वीं कोशिश में बिहार पुलिस में चयन — भोजपुर के गोलू की प्रेरक कहानी करियर एक घंटा पहले 3
भोजपुर के बेहरा गांव के अभिषेक उर्फ गोलू ने लगातार 12 असफलताओं के बाद 13वें प्रयास में बिहार पुलिस सिपाही भर्ती में सफलता हासिल की। आर्थिक तंगी और कोचिंग के अभाव में उन्होंने सेल्फ स्टडी के दम पर यह मुकाम पाया।

कहा जाता है कि अगर इरादे बुलंद हों तो गरीबी और मुश्किलें भी राह नहीं रोक सकतीं। भोजपुर जिले के बेहरा गांव के रहने वाले अभिषेक उर्फ गोलू ने अपनी मेहनत और लगन से इस कहावत को पूरी तरह सच कर दिखाया है। सिपाही और डिफेंस की अलग-अलग भर्तियों में लगातार 12 बार नाकाम होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार 13वीं कोशिश में बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ली।

साधारण किसान परिवार से ताल्लुक

अभिषेक एक बेहद साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता दूधनाथ सिंह खेती-बाड़ी कर किसी तरह परिवार का गुजारा चलाते हैं। चार बहनों और तीन भाइयों वाले इस बड़े परिवार में आर्थिक हालात हमेशा एक चुनौती बने रहे। घर की जिम्मेदारियों और सीमित संसाधनों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि अभिषेक घर के बड़े बेटे भी हैं।

परीक्षा देने के लिए नहीं होता था किराया

अभिषेक बताते हैं कि कई बार परीक्षा देने दूसरे शहर जाना तक मुश्किल हो जाता था, क्योंकि किराए और दूसरे खर्चों के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते थे। कोचिंग करने की भी आर्थिक क्षमता उनके पास नहीं थी। लेकिन उन्होंने इन परिस्थितियों को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

उन्होंने खुद ही पढ़ाई की और किताबों तथा पुराने नोट्स के सहारे लिखित परीक्षा की तैयारी की। शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए उन्होंने गांव के अनुभवी और वरिष्ठ युवाओं से मार्गदर्शन लेकर नियमित अभ्यास किया। लगातार मिलती असफलताओं ने कई बार उनका हौसला तोड़ने की कोशिश की और 12 बार रिजल्ट में नाम न आने के बाद उम्मीदें कमजोर पड़ने लगी थीं। मगर अभिषेक ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी, और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और बिहार पुलिस में सिपाही पद पर उनका चयन हो गया।

आखिरी पल तक नहीं छोड़ी कोशिश

भले ही कुछ लोग सिपाही की नौकरी को एक सामान्य उपलब्धि मानें, लेकिन अभिषेक और उनके परिवार के लिए यह किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में मिली सफलता से कम नहीं है। यह महज एक नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, त्याग और मेहनत का नतीजा है।

अभिषेक कहते हैं कि इस सफलता से मैं और मेरा पूरा परिवार बहुत खुश है। कई बार लगा कि शायद अब मुझसे नहीं हो पाएगा। अगर इस बार भी कामयाबी नहीं मिलती तो मैं मजदूरी करने बाहर निकल जाता। लेकिन मैंने आखिरी समय तक कोशिश नहीं छोड़ी और भगवान ने मेहनत का फल दे दिया।

लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा

अभिषेक की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक-दो असफलताओं के बाद ही निराश हो जाते हैं। उनका सफर यह बताता है कि सफलता अक्सर उन्हीं को मिलती है, जो बार-बार गिरकर भी उठ खड़े होने का साहस रखते हैं। 12 असफलताओं के बाद मिली यह जीत साबित करती है कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!