विदेश में पढ़ाई का सपना? केवल IELTS काफी नहीं, जानें कौन-कौन सी प्रवेश परीक्षाएं देनी होंगी करियर एक घंटा पहले 2
विदेश की यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए सिर्फ IELTS का स्कोर पर्याप्त नहीं होता। कोर्स और देश के हिसाब से TOEFL, PTE, SAT, ACT, GRE और GMAT जैसी परीक्षाएं भी जरूरी होती हैं।

ग्लोबल एक्सपोजर, बेहतर जीवनशैली और शानदार करियर की चाहत में हर साल बड़ी संख्या में छात्र विदेश जाकर पढ़ाई का सपना संजोते हैं। अमेरिका हो या ब्रिटेन, कनाडा हो या ऑस्ट्रेलिया—जॉब मार्केट में विदेशी यूनिवर्सिटी की डिग्री की कीमत आज भी बहुत ऊंची मानी जाती है। लेकिन दाखिले से पहले यह जान लेना बेहद जरूरी है कि किस कोर्स और किस देश के लिए कौन-सी प्रवेश परीक्षा देनी होगी।

IELTS, TOEFL, GRE, GMAT—इन नामों को सुनते ही कई अच्छे-खासे छात्रों की उलझन बढ़ जाती है। हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है। दरअसल ये परीक्षाएं सिर्फ यह आंकने का जरिया हैं कि छात्र वहां के माहौल और पढ़ाई के तौर-तरीकों में खुद को ढाल पाएगा या नहीं। मोटे तौर पर इन परीक्षाओं को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है—पहला, भाषा की पकड़ जांचने वाला 'इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट' और दूसरा, सोच एवं तर्कशक्ति परखने वाला 'एप्टीट्यूड टेस्ट'।

इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट: अंग्रेजी की पकड़ की कसौटी

अगर आप किसी ऐसे देश में पढ़ने जा रहे हैं जहां पढ़ाई का माध्यम मुख्य रूप से अंग्रेजी है, तो आपको यह साबित करना होगा कि आप वहां प्रोफेसर की बातें समझ सकेंगे। इसके लिए तीन परीक्षाएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं।

IELTS (International English Language Testing System)

यह दुनिया की सबसे लोकप्रिय अंग्रेजी परीक्षा है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड में इसे सबसे अधिक मान्यता मिलती है। इसमें अंग्रेजी की लिसनिंग, रीडिंग, राइटिंग और स्पीकिंग क्षमता को परखा जाता है।

TOEFL (Test of English as a Foreign Language)

अगर आपका लक्ष्य अमेरिका के कॉलेज हैं तो TOEFL सबसे उपयुक्त विकल्प है। यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित होती है और इसका जोर अमेरिकन इंग्लिश पर अधिक रहता है।

PTE (Pearson Test of English)

आजकल कई छात्र PTE की ओर भी रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसका परिणाम बहुत जल्दी—आमतौर पर 48 घंटे में—आ जाता है।

12वीं के बाद अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए: SAT और ACT

अगर आप भारत में 12वीं पास करने के तुरंत बाद अमेरिका या कनाडा से ग्रेजुएशन यानी बैचलर डिग्री करना चाहते हैं, तो भाषा परीक्षा के साथ-साथ एप्टीट्यूड टेस्ट भी देना पड़ सकता है।

SAT (Scholastic Assessment Test)

इस परीक्षा के जरिए यूनिवर्सिटीज मैथ्स, रीडिंग और राइटिंग स्किल्स को जांचती हैं। इसके माध्यम से छात्र की क्रिटिकल थिंकिंग को मापा जाता है।

ACT (American College Testing)

यह काफी हद तक SAT जैसी ही है, लेकिन इसमें साइंस का एक अतिरिक्त सेक्शन भी शामिल होता है। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार इन दोनों में से कोई एक परीक्षा चुन सकते हैं।

मास्टर्स और MS के लिए: GRE सबसे अहम

अगर आप भारत से बीटेक, बीएससी या कोई अन्य ग्रेजुएशन कोर्स पूरा करने के बाद विदेश से टेक, साइंस या ह्यूमैनिटीज में मास्टर्स (MS) करना चाहते हैं, तो आपको GRE (Graduate Record Examination) देना होगा।

GRE में वर्बल रीजनिंग, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (मैथ्स) और एनालिटिकल राइटिंग की परीक्षा होती है। दुनियाभर के हजारों ग्रेजुएट स्कूल, खासकर अमेरिका और यूरोप में, दाखिले के समय GRE स्कोर को काफी महत्व देते हैं।

एमबीए और बिजनेस कोर्स के लिए: GMAT का दबदबा

अगर आप विदेश के किसी बड़े बिजनेस स्कूल से एमबीए या मैनेजमेंट का कोई टॉप कोर्स करना चाहते हैं, तो आपको GMAT (Graduate Management Admission Test) का रास्ता अपनाना होगा।

GMAT को खासतौर पर बिजनेस स्कूलों के लिए तैयार किया गया है। इसमें यह परखा जाता है कि छात्र के भीतर डेटा को समझने, बड़े फैसले लेने और बिजनेस को संभालने की एनालिटिकल एवं क्रिटिकल क्षमता है या नहीं। कई बिजनेस स्कूल GRE स्कोर को भी स्वीकार कर लेते हैं, फिर भी इस क्षेत्र में GMAT को आज भी 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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