ED कोई सुपर कॉप नहीं है, हर मामले में दखल नहीं दे सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट राष्ट्रीय राजनीति 46 मिनट पहले 3
कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस विधायक के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मुख्य अपराध के बिना ईडी खुद से जांच शुरू नहीं कर सकती।

ईडी की शक्तियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच के दायरे को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया है कि ईडी कोई सुपर कॉप नहीं है, जिसे हर तरह के मामले में जांच शुरू करने का अधिकार प्राप्त हो। हाईकोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत कार्रवाई तभी शुरू की जा सकती है, जब किसी दूसरी जांच एजेंसी द्वारा पहले से कोई प्राथमिक अपराध दर्ज किया गया हो या उसके खिलाफ औपचारिक एफआईआर मौजूद हो।

क्या है पूरा मामला और अदालत का तर्क

जस्टिस एमआई अरुण की पीठ ने कांग्रेस विधायक केवाई नांजे गौड़ा और अन्य के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज की गई एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट यानी ECIR को रद्द करते हुए यह आदेश दिया। यह पूरा विवाद कोलार-चिक्काबल्लापुर मिल्क यूनियन यानी कोमल में भर्ती के दौरान हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। इस मामले में कुल पांच याचिकाएं अदालत में दाखिल की गई थीं, जिन पर सुनवाई के बाद यह फैसला आया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ईडी की जांच की शक्ति कोई स्वतंत्र या मूल अधिकार नहीं है। यह पूरी तरह से उस बुनियादी अपराध पर टिकी है जो किसी दूसरी एजेंसी की एफआईआर या शिकायत से पैदा होता है। यदि मुख्य अपराध ही कानूनी रूप से खत्म हो जाए या आरोपी के पक्ष में उसका निपटारा हो जाए, तो उसके आधार पर शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी आगे नहीं बढ़ सकती।

जांच का आधार और क्लोजर रिपोर्ट

ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत 30 नवंबर 2023 को की थी। जांच का मुख्य केंद्र जमीन आवंटन से जुड़ा एक विवाद था। आरोप यह था कि मालूर लैंड ग्रांट कमेटी के अध्यक्ष के रूप में केवाई नांजे गौड़ा ने 38 लोगों को करीब 80 एकड़ भूमि आवंटित करने की गलत सिफारिश की थी। इस मामले में एक निजी शिकायत के आधार पर अपराध संख्या 489/2022 के तहत केस दर्ज किया गया था।

हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह मामला ट्रायल स्तर तक नहीं पहुंच सका। जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने भी आवश्यक सरकारी मंजूरी न मिल पाने और अभियोजन पक्ष के अभाव में इस मामले को खारिज कर दिया था।

अदालत का स्पष्ट संदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब मूल अपराध से जुड़ी कानूनी कार्यवाही ही अपने मुकाम पर पहुंच चुकी है और खारिज हो चुकी है, तो उस आधार पर ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत कार्रवाई जारी रखना पूरी तरह से अनुचित है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी केवल मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह मात्र के आधार पर जांच का दायरा नहीं फैला सकती। उसे हमेशा एक वैध प्राथमिक अपराध की आवश्यकता होती है।

इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायक केवाई नांजे गौड़ा को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज ECIR को निरस्त कर दिया है। यह फैसला भविष्य में ईडी की कार्यप्रणाली और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच की सीमाओं को परिभाषित करने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने ईडी को उसके अधिकार क्षेत्र की याद दिलाते हुए एक स्पष्ट कानूनी नजीर पेश की है कि कानून के दायरे से बाहर जाकर जांच नहीं की जा सकती।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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