डकवर्थ-लुईस नियम क्या है? आसान भाषा में समझिए इसका पूरा गणित और हार-जीत का हिसाब क्रिकेट एक घंटा पहले 2
सीमित ओवरों के क्रिकेट में बारिश से बाधित मुकाबलों का नतीजा तय करने वाले डकवर्थ-लुईस नियम की पूरी प्रक्रिया, जिसके चलते दांबुला में भारत के 349 रन बनाने के बावजूद अफगानिस्तान 'ए' ने 4 रन से जीत हासिल की।

क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल यूं ही नहीं कहा जाता। लेकिन जैसे ही इस खेल में बारिश की दखलअंदाजी होती है, गणित के समीकरण बड़े-बड़े जानकारों को भी उलझा देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प नजारा श्रीलंका के दांबुला में देखने को मिला, जहां इंडिया 'ए' और अफगानिस्तान 'ए' के बीच वनडे ट्राई-सीरीज का एक मुकाबला खेला गया। इस मैच में रनों की झड़ी तो लगी, मगर जीत का फैसला आसमान से बरसे पानी और डकवर्थ-लुईस नियम की पेचीदा गणना से हुआ।

दांबुला में क्या हुआ?

मुकाबले की शुरुआत भारत की दमदार बल्लेबाजी से हुई। हालांकि खेल के बीच ही बारिश आ गई, जिसके चलते भारतीय पारी में से एक ओवर कम करना पड़ा। इस तरह 50 ओवर का खेल भारत के लिए 49 ओवर का रह गया। भारतीय बल्लेबाजों ने इस कटौती को बिल्कुल भी दबाव की तरह नहीं लिया और अफगानिस्तान के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। निर्धारित 49 ओवरों में भारत 'ए' ने 9 विकेट के नुकसान पर 349 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।

इतना बड़ा लक्ष्य देखकर ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम की जीत लगभग पक्की है, लेकिन असली रोमांच तो दूसरी पारी में बाकी था। 350 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान 'ए' की शुरुआत शानदार रही। तभी कुदरत ने एक बार फिर खेल में दखल दिया। लगातार बारिश के कारण मुकाबले को काफी देर तक रोकना पड़ा और मैदान खेलने लायक नहीं बचा।

कैसे बदला मैच का रुख

जब दोबारा खेल शुरू करने की स्थिति बनी, तो समय की बर्बादी को देखते हुए अफगानिस्तान के सामने ओवर और रन दोनों में बड़ी कटौती की गई। अफगानिस्तान 'ए' को जीत के लिए संशोधित लक्ष्य 38 ओवरों में 294 रनों का दिया गया। मेहमान टीम के बल्लेबाजों ने इस नए लक्ष्य को ध्यान में रखकर आक्रामक और समझदारी भरी बल्लेबाजी की और 25.5 ओवरों में सिर्फ 2 विकेट गंवाकर 177 रन बना लिए।

तभी मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर मुकाबला रोक दिया। इस बार पानी इतना तेज था कि आगे खेल होना संभव नहीं रहा। अंपायरों ने डकवर्थ-लुईस नियम का सहारा लिया और गणना के बाद पाया कि उस मोड़ पर अफगानिस्तान की टीम पार-स्कोर से 4 रन आगे चल रही थी। नतीजा यह रहा कि अफगानिस्तान को इसी नियम के तहत 4 रन से विजेता घोषित कर दिया गया।

आखिर डकवर्थ-लुईस नियम है क्या?

सीमित ओवरों के क्रिकेट यानी वनडे और टी20 में जब भी बारिश या किसी प्राकृतिक वजह से खेल बाधित होता है, तो डकवर्थ-लुईस नियम (DLS) लागू किया जाता है। क्रिकेट प्रेमियों के बीच इस नियम की अक्सर आलोचना होती है, क्योंकि इसे समझ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।

इस नियम का बुनियादी सिद्धांत 'रिसोर्स' यानी संसाधन पर टिका है। मैदान पर किसी भी टीम के पास रन बनाने के लिए दो मुख्य संसाधन होते हैं — पहला, बचे हुए ओवर और दूसरा, हाथ में बचे हुए विकेट। इस नियम के तहत एक खास टेबल बनाई गई है, जिसमें मैच की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार दोनों टीमों के पास उपलब्ध 'रिसोर्स प्रतिशत' का पूरा ब्योरा रहता है। यदि मैच के दौरान बाधा आती है, तो लक्ष्य का पीछा कर रही टीम (टीम 2) को नया टारगेट दिया जाता है। अगर खेल बार-बार रुके, तो जितनी बार ऐसा होगा, उतनी बार यह लक्ष्य बदल सकता है।

कैसे अस्तित्व में आया यह नियम?

इस ऐतिहासिक और क्रांतिकारी गणितीय फॉर्मूले को इंग्लैंड के दो सांख्यिकी विशेषज्ञों फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने तैयार किया था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसका इस्तेमाल पहली बार साल 1997 में किया गया था। समय के साथ क्रिकेट का अंदाज जैसे-जैसे आक्रामक होता गया, इस नियम को और सटीक बनाने की जरूरत महसूस की गई। साल 2015 के वनडे विश्व कप से ठीक पहले ऑस्ट्रेलियाई अकादमिक स्टीन स्टर्न ने इस फॉर्मूले को आधुनिक क्रिकेट के अनुरूप अपडेट किया। तभी से इसे आधिकारिक रूप से 'डकवर्थ-लुईस-स्टर्न' नियम कहा जाता है।

नया लक्ष्य कैसे तय होता है?

नियम के मुताबिक, इस बात का बारीकी से आकलन किया जाता है कि पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम ने जितने संसाधनों का इस्तेमाल किया, उसके मुकाबले दूसरी टीम के पास कितने संसाधन बचे हैं। इसका सामान्य फॉर्मूला कुछ इस तरह है:

टीम 2 का नया लक्ष्य = टीम 1 का स्कोर × (टीम 2 के रिसोर्स ÷ टीम 1 के रिसोर्स)

सिर्फ रन नहीं, विकेट बचाना भी अहम

सुनने में यह फॉर्मूला भले सीधा लगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 'रिसोर्स वैल्यू' की सटीक गणना एक बेहद जटिल कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए की जाती है। यही वजह रही कि दांबुला वनडे में भारत के 349 रन बनाने के बावजूद, मजबूत विकेट स्थिति यानी 25.5 ओवर में केवल 2 विकेट खोने के कारण अफगानिस्तान की टीम डकवर्थ-लुईस के पार-स्कोर से आगे निकल गई और मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह मैच इस बात का सटीक उदाहरण है कि आधुनिक क्रिकेट में सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि विकेट बचाकर रन गति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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