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एक घंटा पहले
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विचारों
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है। विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि वह पिछली DMK सरकार के कार्यकाल के दौरान के कथित भ्रष्टाचार की फाइलों को तुरंत सबके सामने लाएं। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के पास कोई भी पुख्ता सबूत हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के कार्रवाई करनी चाहिए। विधानसभा में चर्चा के दौरान उदयनिधि ने मुख्यमंत्री के बात करने के अंदाज पर कड़ा ऐतराज जताया और उन पर फिल्मी तरीका अपनाने का आरोप लगाया।
'फिल्मों की तरह जोरदार डायलॉग न बोलें'
विधानसभा के भीतर अपनी बात रखते हुए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के आक्रामक रवैये की कड़ी आलोचना की। उदयनिधि ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधानसभा जनता के जरूरी मुद्दों पर बहस करने की जगह है, न कि फिल्मी संवाद बोलने का मंच। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "आप अब इस राज्य के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए विधानसभा में फिल्मों की तरह जोरदार डायलॉग बोलने से आपको बचना चाहिए।" दरअसल, मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में कहा था कि वह सही समय आने पर पिछली DMK सरकार के समय की भ्रष्टाचार की फाइलों को खोलेंगे, जिसका उदयनिधि ने अब जवाब दिया है।
तुरंत फाइलें खोलने और कार्रवाई करने की खुली चुनौती
उदयनिधि स्टालिन ने भ्रष्टाचार से जुड़े दावों को सार्वजनिक करने में हो रही देरी पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार के पास आरोपों को सच साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत ही नहीं हैं। उदयनिधि ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा:
"मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि वे तुरंत उन फाइलों को खोलें। अगर उनके पास भ्रष्टाचार के कोई भी ठोस सबूत मौजूद हैं, तो उन्हें तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। आखिर मुख्यमंत्री इन फाइलों को सार्वजनिक करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों दिखा रहे हैं? क्या वह इसके लिए कोई तारीख तय करवाने के लिए अपने किसी ज्योतिषी के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं?"
हालांकि, मुख्यमंत्री विजय ने सदन के भीतर उदयनिधि के इन तीखे सवालों का खुद कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उनकी तरफ से राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री ने मोर्चा संभाला और सरकार का बचाव किया। शिक्षा मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विजय पूरी तरह से पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी इन फाइलों को बिल्कुल सही समय आने पर सार्वजनिक किया जाएगा।
सीएम विजय के किस बयान से शुरू हुआ यह विवाद?
इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत बुधवार को मुख्यमंत्री विजय के एक बयान से हुई थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास सरकार के तीन विभागों में हुए कथित भ्रष्टाचार की पूरी जानकारी वाली फाइलें मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने DMK के पूर्व मंत्रियों और विधायकों को चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि वे उन्हें ये फाइलें खोलने के लिए मजबूर न करें। विजय का कहना था कि वह सही वक्त आने पर इन सभी जानकारियों को सार्वजनिक करेंगे।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद विधानसभा के भीतर DMK और TVK के विधायकों के बीच जमकर कहासुनी हुई। दोनों पक्षों के सदस्यों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। इससे पहले, 7 अगस्त को भी तमिलनाडु विधानसभा में भ्रष्टाचार के आरोपों, वित्तीय प्रबंधन और जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के मुद्दों पर सत्ताधारी TVK और विपक्षी DMK के सदस्यों के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी।
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