देश भर में दवाओं की डिजिटल क्रांति, सरकार ने लॉन्च की पहली स्मार्ट नेशनल ड्रग रजिस्ट्री राष्ट्रीय राजनीति एक महीने पहले 69
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने देश की पहली राष्ट्रीय ड्रग रजिस्ट्री पेश की है, जिससे अब दवाओं की पहचान डिजिटल होगी और डॉक्टरों के लिए प्रिस्क्रिप्शन लिखना बेहद आसान हो जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल सुधार की दिशा में बड़ा कदम

केंद्र सरकार ने देश के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को देश की पहली राष्ट्रीय ड्रग रजिस्ट्री का औपचारिक रूप से अनावरण किया। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य देश भर में दवाओं की जानकारी को एक समान और मानकीकृत स्वरूप प्रदान करना है, जिससे डिजिटल हेल्थ सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आ सके।

क्यों जरूरी थी यह नई व्यवस्था

अब तक दवाओं के अलग-अलग नाम और उनके फॉर्मेट की भिन्नता के कारण डेटा एंट्री में त्रुटियां होने की संभावना बनी रहती थी, जिससे कभी-कभी डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन लिखने में परेशानी होती थी। इस नई रजिस्ट्री के लागू होने से हर दवा को एक यूनिक डिजिटल पहचान मिलेगी। इससे दवाओं की जानकारी के लेन-देन में पारदर्शिता आएगी और ई-प्रिस्क्रिप्शन अधिक सटीक हो पाएंगे। यह पूरी व्यवस्था आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत तैयार की गई है, जिसे CDSCO और NRCeS, पुणे के आपसी सहयोग से विकसित किया गया है।

रजिस्ट्री के मुख्य आंकड़े

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दवाओं का व्यापक डेटा उपलब्ध कराया गया है। ड्रग रजिस्ट्री की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • 1.23 लाख से ज्यादा ब्रांडेड दवाएं उपलब्ध हैं।
  • 10 हजार से अधिक जेनेरिक दवाओं की सूची दर्ज है।
  • 29 हजार से ज्यादा दवा में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों का विवरण शामिल है।

कैसे काम करेगी यह प्रणाली

दवाओं की सटीक जानकारी खोजने के लिए यह रजिस्ट्री बेहद आसान इंटरफेस प्रदान करती है। कोई भी व्यक्ति या डॉक्टर जेनेरिक नाम, ब्रांड नाम, दवा के पदार्थ, या फिर दवा बनाने वाली कंपनी के आधार पर दवा को खोज सकेगा। यह सिस्टम सीधे तौर पर हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम (HMIS), ई-प्रिस्क्रिप्शन प्लेटफॉर्म और ABDM से जुड़े सभी डिजिटल स्वास्थ्य मंचों से जुड़ा रहेगा।

इस पहल से आम लोगों को क्या लाभ होगा

इस डिजिटल पहल से दवाओं से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान काफी सरल और प्रमाणित हो जाएगा। इसके लाभ नीचे दिए गए हैं:

  • पूरे देश में दवाओं से जुड़ी जानकारी एक समान और प्रमाणित रहेगी।
  • अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद और बेहतर होगा।
  • डिजिटल हेल्थ सिस्टम अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बनेगा, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज में मदद मिलेगी।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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