मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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यातायात पुलिस का मानवीय चेहरा
आमतौर पर यातायात पुलिस का नाम सुनते ही चालान, भारी जुर्माने और सख्ती का खयाल मन में आता है। लेकिन मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले की पुलिस ने इस छवि से इतर एक ऐसी मिसाल कायम की है जो समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। पुलिस की सक्रियता का मुख्य उद्देश्य केवल कानून का पालन कराना ही नहीं, बल्कि वक्त पड़ने पर आम नागरिकों की जान बचाना भी है। यह घटना डिंडौरी जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर जबलपुर-अमरकंटक राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित जोगी टिकरिया घाट की है, जहां पुलिस के एक संवेदनशील निर्णय ने एक बुजुर्ग महिला को समय पर इलाज मुहैया कराया।
चेकिंग के डर से सड़क किनारे रुकी बाइक
घटना उस समय हुई जब यातायात पुलिस वहां नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। उसी रास्ते से सारंगपुर परडिया निवासी पंचम मरावी अपनी 60 वर्षीय बीमार मां बिसरी बाई को इलाज के लिए मोटरसाइकिल पर बैठाकर डिंडौरी अस्पताल ले जा रहे थे। मोटरसाइकिल चालक पंचम के पास न तो कोई वैध दस्तावेज थे और न ही उसने हेलमेट पहन रखा था। पुलिस की कार्रवाई के डर और जुर्माने की आशंका के चलते उसने चेकिंग पॉइंट से करीब 100 मीटर पहले ही अपनी बाइक सड़क के किनारे रोक दी। देखते ही देखते महिला की तबीयत और बिगड़ गई और वह दर्द के मारे सड़क किनारे पत्थरों पर ही लेट गई। वहां मौजूद अन्य लोगों ने जब महिला की स्थिति देखी, तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिसकर्मियों को दी।
दस्तावेजों की कमी और पुलिस का रुख
करीब 20 मिनट की जद्दोजहद के बाद पंचम मरावी ने पूरी स्थिति स्पष्ट की। उसने पुलिस को बताया कि घर में अचानक मां की तबीयत खराब होने के कारण वह अत्यधिक घबराहट और जल्दबाजी में थे, जिसके चलते वह अपना हेलमेट और गाड़ी के आवश्यक दस्तावेज घर पर ही छोड़ आए। पुलिस के सामने डरने का कारण यही था। जब यह पूरा मामला यातायात पुलिस के एएसआई राम स्वरूप विश्वकर्मा के संज्ञान में आया, तो उन्होंने बिना किसी देरी के मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी। उन्होंने पंचम पर जुर्माना लगाने या बाइक जब्त करने की कार्रवाई करने के बजाय महिला की जान बचाने को सर्वोपरि माना और तत्काल उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भिजवाने के निर्देश दिए।
समय पर इलाज मिलने से बची जान
समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण बिसरी बाई को तत्काल उपचार मिल गया, जिससे उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ने से बच गई। इस घटना के बाद परिजनों ने यातायात पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। पंचम मरावी ने कहा कि यदि पुलिस उस वक्त मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाती, तो उनकी मां की सेहत और ज्यादा नाजुक हो सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यातायात पुलिस ने एक बार फिर सभी वाहन चालकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करें, हेलमेट लगाएं और गाड़ी के कागजात हमेशा साथ रखें। साथ ही पुलिस ने यह संदेश भी दिया कि आपातकालीन स्थितियों में इंसानियत और लोगों की जान बचाना ही कानून का पहला कर्तव्य है। स्थानीय लोग पुलिस की इस कार्यशैली की जमकर सराहना कर रहे हैं और इसे समाज के लिए एक बड़ा उदाहरण मान रहे हैं।
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