झारखंड का खास कोड़ी का तेल: महुआ के बीजों से तैयार होता है यह शुद्ध और दुर्लभ देसी उत्पाद झारखंड एक दिन पहले 20
झारखंड के वनों में पाए जाने वाले महुआ के बीजों से पारंपरिक तरीके से निकाला जाने वाला तेल स्वाद और शुद्धता के लिए मशहूर है, जिसे स्थानीय लोग कोड़ी का तेल कहते हैं।

झारखंड की प्राकृतिक धरोहर

झारखंड राज्य अपनी समृद्ध खनिज संपदा, घने जंगलों और विशाल प्राकृतिक संसाधनों के लिए पूरे भारत में विख्यात है। यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल में मिलने वाले पेड़-पौधे आज भी वहां के निवासियों के जीवन का अभिन्न अंग बने हुए हैं। इन पेड़ों में महुआ का विशेष महत्व है, जिसे स्थानीय ग्रामीण अपनी एक अमूल्य धरोहर मानते हैं।

महुआ का उपयोग और कोड़ी का तेल

देवघर, दुमका, जामताड़ा, गोड्डा और साहिबगंज जैसे जिलों के गांवों में महुआ के पेड़ बड़ी तादाद में पाए जाते हैं। महुआ के फूल, फल और इसके बीज तीनों का ही उपयोग अलग-अलग रूपों में किया जाता है। इनमें से सबसे अधिक लोकप्रिय महुआ के बीजों से तैयार होने वाला तेल है। देवघर और आसपास के क्षेत्रों में इसे स्थानीय बोलचाल की भाषा में कोड़ी का तेल के नाम से पुकारा जाता है। अपनी विशिष्ट महक और शुद्धता के कारण यह तेल आज भी बड़ी संख्या में लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। साल के केवल कुछ चुनिंदा महीनों में ही यह तेल उपलब्ध हो पाता है, जिससे इसकी मांग और महत्व और भी बढ़ जाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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