मुंबई ट्रैफिक में फंसी नितिन गडकरी की गाड़ी, मंत्री ने देरी के लिए खुद को माना जिम्मेदार महाराष्ट्र 2 घंटे पहले 5
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान एक घंटे देरी से पहुंचे। उन्होंने ट्रैफिक जाम में फंसने की बात स्वीकार की और सुधार के लिए नई तकनीकों पर जोर दिया।

ट्रैफिक जाम और गडकरी का स्वीकारोक्ति

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी हाल ही में मुंबई में आयोजित 22वें इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में वह तय समय से करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। मंच पर पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी देरी का सीधा कारण मुंबई की सड़कों पर लगे भारी ट्रैफिक जाम को बताया। बड़ी बात यह रही कि नितिन गडकरी ने इस देरी का पूरा जिम्मा खुद पर लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह वर्ली से होटल तक के सफर के दौरान लगभग एक घंटे तक जाम में फंसे रहे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि आज कार्यक्रम में आने में हुई देरी का खामियाजा वह खुद भुगत रहे हैं।

मल्टी-लेवल फ्लाईओवर का विकल्प

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर बात करते हुए नितिन गडकरी ने पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 से 2000 के बीच उन्होंने 55 फ्लाईओवर, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और बांद्रा-वर्ली सी लिंक जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाई थी। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थितियों और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों के हिसाब से वे प्रोजेक्ट्स बहुत जरूरी थे। हालांकि, अब समय बदल चुका है और तकनीक में भी बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने जोर दिया कि अब हमें ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए नई और आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। नितिन गडकरी ने सुझाव दिया कि मौजूदा फ्लाईओवरों की बाधाओं को दूर करने के लिए अब मल्टी-लेवल फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि एक ही पियर (स्तंभ) का उपयोग करके अलग-अलग स्तरों पर सड़कों और उनके ऊपर मेट्रो के निर्माण की योजना बनाई जा सकती है।

भारत-अमेरिका साझेदारी का महत्व

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने तकनीक और बुनियादी ढांचे को देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच उद्योग, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर चर्चा की। गडकरी ने कहा कि भारत के पास कुशल इंजीनियर और उद्यमियों की बड़ी फौज है, जबकि अमेरिका के पास संसाधन और उन्नत तकनीक की मजबूत क्षमता है। यदि इन दोनों ताकतों को मिला दिया जाए, तो यह दोनों देशों के लिए एक लाभकारी स्थिति होगी। उन्होंने उद्यमिता को रोजगार पैदा करने का मुख्य जरिया बताया। उनके अनुसार, देश में गरीबी मिटाने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक रोजगार के अवसर तैयार करना है, जिसके लिए निवेश और व्यापार का बढ़ना अनिवार्य है। अंत में, उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी तकनीक में भारत की प्रगति को साझा किया। उन्होंने बताया कि लिथियम-आयन के अलावा अब जिंक-आयन, सोडियम-आयन और एल्युमिनियम-आयन जैसी वैकल्पिक तकनीकों पर भी काम हो रहा है। उन्होंने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की प्रशंसा की और सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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