झारखंड
3 दिन पहले
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देवघर के लोगों को पूरे आठ साल बाद एक बार फिर शानदार खरीदारी का अवसर मिला है। शिवलोक परिसर में लगे हस्तशिल्प उत्सव मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों के मशहूर उत्पाद एक ही जगह उपलब्ध हैं। कम कीमत में बेहतरीन सामान खरीदने के इच्छुक लोगों के लिए यह मेला बेहतरीन विकल्प साबित हो रहा है, जहां 15 राज्यों के प्रसिद्ध उत्पाद देखने और खरीदने को मिल रहे हैं। हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
एक ही छत के नीचे कई राज्यों की कला
मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मिलने वाले अनेक सामान बाजार की तुलना में अपेक्षाकृत कम दाम पर उपलब्ध हैं, जिससे आम लोगों को भी अच्छी खरीदारी का मौका मिल रहा है। पूरा परिसर रंग-बिरंगे और आकर्षक माहौल से भरा नजर आ रहा है। यहां विभिन्न राज्यों की संस्कृति, कला और हस्तशिल्प की अनूठी झलक देखने को मिलती है। यही वजह है कि यह आयोजन स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
14 जून से शुरू हुआ आयोजन
शिवलोक परिसर में हस्तशिल्प उत्सव मेले की शुरुआत 14 जून से हुई है, जो 5 जुलाई तक जारी रहेगा। मेले के आयोजक और लखनऊ निवासी सुनील शर्मा ने बताया कि इस बार देश के करीब 15 राज्यों के कारीगर और व्यापारी अपने-अपने राज्यों के मशहूर उत्पाद लेकर देवघर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि अब लोगों को अलग-अलग राज्यों में जाकर खरीदारी करने की जरूरत नहीं, क्योंकि कई राज्यों की खास वस्तुएं एक ही स्थान पर मौजूद हैं।
मेले में लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी के परिधान, सहारनपुर की लकड़ी से बनी आकर्षक सजावटी वस्तुएं, राजस्थान का मशहूर चूरमा और कई अन्य पारंपरिक उत्पाद लोगों को खूब भा रहे हैं। तकरीबन हर स्टॉल पर खरीदारों की भीड़ देखी जा रही है।
200 रुपये से शुरू हो रही कुर्तियां
महिलाओं के लिए मेले में खरीदारी के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं। यहां मात्र 200 रुपये से कुर्तियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा जयपुरी कॉटन ड्रेस, दिल्ली के स्टाइलिश शरारे, राजस्थानी सूट, जयपुरी प्रिंट की कुर्तियां, लखनऊ की चिकनकारी और कई तरह के फैशनेबल परिधान बिक्री के लिए रखे गए हैं। कपड़ों की कीमत 200 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक है, जिससे हर वर्ग के लोग अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।
इन स्टॉलों को लेकर महिलाओं और युवतियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कपड़ों के अलावा हस्तनिर्मित सजावटी सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और पारंपरिक उत्पाद भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
5 जुलाई तक चलेगा मेला
मेले का संचालन प्रतिदिन सुबह करीब 11:30 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक होता है। शाम के समय यहां सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है। परिवार के साथ आने वाले लोग खरीदारी के साथ-साथ मेले के माहौल का भी भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक इस मेले का मकसद देश के विभिन्न हिस्सों की कला और हस्तशिल्प को लोगों तक पहुंचाना है, ताकि कारीगरों को बेहतर बाजार मिल सके और ग्राहकों को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध हो सकें। ऐसे में यदि आप भी कुछ खास, पारंपरिक और किफायती सामान खरीदना चाहते हैं, तो 5 जुलाई तक चलने वाले इस आयोजन का रुख कर सकते हैं।
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