झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
देवघर में सुबह की पहली किरण फूटते ही कृष्णा टॉकीज परिसर में सुई-धागे की दुनिया हरकत में आ जाती है। चारों ओर सिलाई मशीनों की घर्र-घर्र गूंजने लगती है, मानो हर मशीन अपने हुनर की कोई नई दास्तान बुन रही हो। यहां कपड़े केवल सिले नहीं जाते, बल्कि हर टांके में बरसों का तजुर्बा, भरोसा और ग्राहकों की पसंद ढाली जाती है।
टावर चौक के भीतर बसा कृष्णा टॉकीज कंपाउंड वर्षों से लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यहां दो, पांच या दस नहीं, बल्कि करीब 30 से 40 टेलरों की दुकानें हैं, जहां हर दिन सैकड़ों लोग अपने मनपसंद कपड़े सिलवाने आते हैं। खास बात यह है कि इनमें कई दुकानें दशकों पुरानी हैं और आज भी उसी पुराने विश्वास के साथ ग्राहकों की सेवा में जुटी हैं।
घंटों में आकार ले लेते हैं कपड़े
इस परिसर की सबसे बड़ी पहचान इसकी तेज और बेहतरीन सेवा है। एक तरफ जहां आजकल कपड़े सिलवाने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता है, वहीं कृष्णा टॉकीज के कई दर्जी महज कुछ घंटों में परिधान तैयार कर देते हैं।
किसी को शादी में शामिल होना हो, किसी को अचानक किसी कार्यक्रम में जाना हो या फिर किसी खास मौके के लिए नया पहनावा चाहिए हो, यहां के कारीगर कम वक्त में शानदार फिटिंग के साथ कपड़े बनाकर सौंप देते हैं। यही वजह है कि सिर्फ देवघर ही नहीं, आसपास के इलाकों से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं।
शादी-ब्याह के परिधान भी होते हैं तैयार
यहां केवल शर्ट-पैंट की सिलाई नहीं होती, बल्कि शेरवानी, सूट, ब्लेजर, लहंगा, कुर्ता-पायजामा और यहां तक कि छोटे-छोटे कपड़ों की सिलाई का काम भी होता है। ग्राहकों की जरूरत और पसंद के मुताबिक डिजाइन गढ़े जाते हैं। आधुनिक फैशन के साथ-साथ पारंपरिक पहनावे को भी यहां के दर्जी बड़ी खूबसूरती से तैयार करते हैं।
सबसे अहम बात यह है कि इतनी बढ़िया गुणवत्ता और फिटिंग के बावजूद यहां सिलाई की कीमत आम आदमी की पहुंच में है। शर्ट-पैंट की सिलाई करीब 500 रुपये से शुरू हो जाती है, जिसके चलते हर तबके के लोग बेझिझक यहां पहुंचते हैं।
क्या कहते हैं दर्जी
जुगनू टेलर के मालिक मोहम्मद अशरफ बताते हैं कि उनका परिवार बरसों से इस पेशे से जुड़ा है। वह बीते 40 वर्षों से इसी दुकान में काम कर रहे हैं और अब इस परंपरा की दूसरी पीढ़ी की नुमाइंदगी कर रहे हैं।
उनके मुताबिक कृष्णा टॉकीज परिसर सिर्फ कारोबार की जगह नहीं, बल्कि दर्जियों की एक ऐसी पहचान है जिसने हजारों परिवारों को रोजगार दिया है। उन्होंने बताया कि यहां आने वाला ग्राहक कभी निराश होकर नहीं लौटता, क्योंकि हर दुकान का मकसद बेहतर काम और ग्राहक की संतुष्टि होता है।
सिलवाने वालों की लगती है लंबी कतार
समय के साथ फैशन भले बदलता रहा, लेकिन कृष्णा टॉकीज परिसर की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई। नई-नई रेडीमेड दुकानों और ऑनलाइन फैशन के इस दौर में भी यहां के दर्जियों पर लोगों का भरोसा कायम है। इसकी सबसे बड़ी वजह है वर्षों का अनुभव, बेहतरीन फिटिंग और ग्राहकों के साथ बना विश्वास।
यही कारण है कि देवघर में जब भी किसी को कपड़ा सिलवाना होता है, तो सबसे पहले कृष्णा टॉकीज परिसर का रास्ता याद आता है। यह जगह आज भी देवघर की टेलरिंग संस्कृति की पहचान बनी हुई है, जहां सुई-धागे से सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि भरोसे और परंपरा की कहानी भी बुनी जाती है।
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