दिल्ली
2 घंटे पहले
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फरार आरोपी का लंबा सफर
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अपराधी को दबोचने में कामयाबी हासिल की है जो पिछले 28 वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहा था। यह आरोपी कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि पुलिसकर्मी की हत्या और हिरासत से फरार होने जैसे गंभीर अपराधों का नामजद आरोपी है। अपनी पहचान छुपाने के लिए उसने मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में अपनी नई जिंदगी शुरू की और खुद को डॉ. झटका के नाम से मशहूर कर लिया। उसने न केवल समाज में अपनी जड़ें जमाईं, बल्कि परिवार भी बसाया और एक फर्जी पहचान के सहारे दशकों तक पुलिस की पहुंच से दूर रहा।
नई पहचान और डॉ. झटका का मुखौटा
आरोपी की पहचान राजिंदर बैरागी के रूप में हुई है, जिसे राजिंदर सिंह यादव के नाम से भी जाना जाता है। 53 वर्षीय यह अपराधी दिल्ली और हरियाणा के कई गंभीर मामलों में घोषित अपराधी था। पुलिस के अनुसार, वर्ष 1999 में वह उत्तर प्रदेश पुलिस की अभिरक्षा से भागने में सफल हो गया था। उस समय उसे गाजियाबाद जेल से हरियाणा की एक अदालत में पेशी के लिए ले जाया जा रहा था, तभी वह सुरक्षा घेरा तोड़कर गायब हो गया।
फरारी काटने के लिए उसने अपनी पहचान पूरी तरह से बदल ली। पहले वह महाराष्ट्र पहुंचा, जहां उसने लगभग एक साल तक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के तौर पर नौकरी की। इसके बाद उसने मध्य प्रदेश का रुख किया। वहां के अशोक नगर जिले के मुंगावली में उसने खुद को राजेंद्र सिंह यादव के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2003 में उसने एक सरकारी सहायक नर्स दाई (एएनएम) से विवाह किया। बिना किसी वैध पंजीकरण के उसने चिकित्सा का काम करना शुरू किया, जिससे स्थानीय लोग उसे डॉ. झटका बुलाने लगे। इसके अलावा वह प्रॉपर्टी और छोटे-मोटे सरकारी ठेकों के काम में भी सक्रिय रहा। आज उसके दो बच्चे हैं, जो स्थानीय स्कूल में पढ़ते हैं, और उसके पड़ोसी उसकी असली सच्चाई से पूरी तरह अनजान थे।
कानून की पकड़ में कैसे आया राजिंदर
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया था। इस दौरान पुलिस की नजर दिल्ली के जनकपुरी थाने में दर्ज वर्ष 1997 के हत्या के प्रयास के दो मामलों पर गई। इन मामलों में 2008 में राजिंदर को अपराधी घोषित किया गया था। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस को पता चला कि यह वही राजिंदर है जो 1998 में हरियाणा पुलिस के सिपाही जय भगवान की हत्या का मुख्य आरोपी था।
इस पूरे मामले की कड़ियां 10 मई 1998 को सोनीपत के सैयां खेड़ा गांव में घटी एक घटना से जुड़ती हैं। उस दिन एक विवाह समारोह के दौरान दुल्हन के परिवार से राजिंदर और उसके पांच हथियारबंद साथियों का विवाद हो गया था। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें दुल्हन के चाचा और हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान की मौत हो गई थी। इस मामले में भी वह आरोपी था, हालांकि बाद में वह हिरासत से भाग निकला था।
क्राइम ब्रांच का डिजिटल जाल
पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) चंदर कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी ने बचने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और मूल निवास जैसे तमाम सरकारी दस्तावेज बनवा लिए थे। उसे पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम ने कई महीनों तक कई राज्यों में गहन जांच की। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल विश्लेषण और जमीनी स्तर पर सूचनाओं का संकलन किया। अंत में, पुलिस टीम ने मुंगावली स्थित उसके घर पर धावा बोलकर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से सभी फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
आठ मामलों का आरोपी
पुलिस ने आरोपी का ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया और उसे दिल्ली लाकर विधिवत गिरफ्तार किया। राजिंदर के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, चोरी और पुलिस हिरासत से फरार होने समेत कुल आठ से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्तमान में पुलिस टीम उससे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन 28 वर्षों की लंबी फरारी के दौरान वह और किन-किन अपराधों में शामिल रहा है। इस गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है क्योंकि अपराधी ने एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीना शुरू कर दिया था, जिससे उसकी पहचान उजागर करना चुनौतीपूर्ण कार्य था।
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