जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंदी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई, जानिए सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच क्या चल रही है हलचल दिल्ली एक महीने पहले 36
दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने के सरकारी फैसले को चुनौती दी गई है। इस बीच, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट में इंटरनेट बहाली पर सुनवाई

दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। यह सुनवाई शुक्रवार को होनी है। याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की पुरजोर मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

इंटरनेट और प्रदर्शन पर लगी पाबंदियों को दी गई चुनौती

इस याचिका में केवल इंटरनेट बंदी को ही नहीं, बल्कि विरोध स्थलों के इर्द-गिर्द लगाए गए अन्य तमाम प्रतिबंधों को भी कानूनी चुनौती दी गई है। याचिका में केंद्र सरकार के उस विवाहित आदेश पर सवाल उठाए गए हैं, जिसके तहत दूरसंचार कंपनियों को मध्य दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को रोकने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जारी प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट पर रोक लगाना नागरिकों के अधिकारों का हनन है।

सीजेपी और सरकार के बीच बातचीत की कोशिश

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी समूह सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच मध्यस्थता की कवायद तेज हो गई है। आज दोपहर साढ़े 12 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोनों पक्षों के बीच वार्ता निर्धारित की गई है। इस बैठक से प्रदर्शन को लेकर कोई ठोस समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले बीते 24 घंटे के भीतर सरकार की ओर से सीजेपी को 4 बार बातचीत का प्रस्ताव दिया गया था। प्रारंभ में सरकार ने सीजेपी को जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय पर आने का आमंत्रण दिया था, लेकिन सीजेपी ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सीजेपी का रुख स्पष्ट था कि यदि सरकार चर्चा करना चाहती है, तो उसे या तो जंतर-मंतर आना होगा या फिर किसी निष्पक्ष स्थान पर वार्ता करनी होगी। आखिरकार केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है।

पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानून की तैयारी

प्रदर्शनकारियों द्वारा जंतर-मंतर से लेकर संसद तक पेपर लीक के मामले पर सरकार पर भारी दबाव बनाया जा रहा है। इस दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधार और बदलाव का अपना कार्ययोजना तैयार कर ली है। आज मोदी कैबिनेट पेपर लीक के मुद्दे पर एक बड़ा और सख्त फैसला लेने जा रही है। इस संबंध में तैयार किए गए विशेष बिल पर कैबिनेट आज अपनी मुहर लगाएगी। प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया है कि उनकी सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक फुल प्रूफ कानून लेकर आएगी। उन्होंने अपने एक वीडियो संदेश के माध्यम से स्पष्ट किया कि इस विषय पर कानून का मसौदा अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा और इसे शीघ्र पारित कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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